‼️सही संसाधन और बेहतर शिक्षण से!..निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा सरकारी विद्यालय‼️
‼️सही संसाधन और बेहतर शिक्षण से!..निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा सरकारी विद्यालय‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
सितंबर गुरुवार 10-9-2026
ग़ाज़ीपुर:- ख़बर गाजीपुर जिले से है जहां पर बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल की व्यवस्था, जर्जर भवनों, शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी बजट के इस्तेमाल को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हाल के दिनों में सरकारी विद्यालयों की व्यवस्थाओं को लेकर हुए प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर चले अभियानों ने भी बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया। ऐसे माहौल में गाजीपुर का एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय उन तमाम सवालों के बीच अलग तस्वीर पेश कर रहा है।

जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय फतेहुल्लापुर में मौजूदा समय में 150 से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे बच्चों की है, जिनका पहले निजी विद्यालयों में दाखिला था, लेकिन अभिभावकों ने निजी स्कूल से नाम कटवाकर अपने बच्चों का एडमिशन इस सरकारी विद्यालय में कराया है। विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही सरकारी स्कूलों को लेकर बनी आम धारणा से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाई देती है। चारों तरफ हरियाली, रंग-बिरंगे फूलों से सजा परिसर और साफ-सुथरे रंग-रोगन वाले भवन बच्चों को आकर्षित करते हैं। कक्षाओं में शिक्षक सिर्फ किताब पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों को विषय को समझाने पर जोर दिया जा रहा है। एक कक्षा में शिक्षिका बच्चों को पहाड़ों की खेती के बारे में अंग्रेजी में पढ़ाती नजर आईं। बच्चों को अंग्रेजी में समझाने के साथ-साथ उसका अर्थ हिंदी में भी बताया जा रहा था, ताकि किसी बच्चे को विषय समझने में परेशानी न हो। खास बात यह रही कि बच्चे भी पूरे आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब देते दिखाई दिए।

दूसरी कक्षा में बच्चों को कहानियों के माध्यम से खेल-खेल में पढ़ाया जा रहा था। यानी पढ़ाई को बोझ बनाने के बजाय उसे बच्चों के लिए रोचक बनाने की कोशिश साफ दिखाई दी।
विद्यालय में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इंडोर और आउटडोर गेम के लिए खेल सामग्री उपलब्ध है। मध्याह्न भोजन के समय बच्चे खेल के माध्यम से भी अपने साथियों के साथ समय बिताते हैं।
इतना ही नहीं, बच्चों की किताबों में दिए गए QR कोड का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। शिक्षक मोबाइल के जरिए संबंधित पाठ को स्कैन कर बच्चों को ऑडियो और वीडियो के माध्यम से विषय समझाते नजर आए। इससे बच्चों को किताब में लिखी चीजों को देखने-सुनने के साथ समझने का अतिरिक्त माध्यम मिल रहा है। जब बच्चों से उनकी पढ़ाई और शिक्षकों के बारे में बात की गई तो उन्होंने भी अपने शिक्षकों की जमकर तारीफ की। बच्चों ने बताया कि शिक्षक उनकी पढ़ाई के साथ-साथ उनकी अन्य जरूरतों का भी ध्यान रखते हैं। अगर किसी बच्चे को अंग्रेजी समझने में दिक्कत होती है तो शिक्षक उसी बात को हिंदी में समझाकर उसकी समस्या दूर करती हैं।
सरकारी स्कूलों को लेकर जब बहस में अक्सर सवाल ही सवाल दिखाई देते हैं, ऐसे समय में फतेहुल्लापुर प्राथमिक विद्यालय एक अलग जवाब पेश करता नजर आ रहा है।
सरकार विद्यालयों के कायाकल्प, संसाधनों और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए बजट देती है। सवाल यह नहीं होना चाहिए कि बजट कितना आया, बल्कि यह होना चाहिए कि उस बजट का इस्तेमाल बच्चों तक कितना पहुंचा। फतेहुल्लापुर विद्यालय की तस्वीर यही बताती है कि अगर उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल हो, शिक्षक जिम्मेदारी के साथ काम करें और विद्यालय को सिर्फ नौकरी की जगह नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी समझा जाए, तो सरकारी स्कूल भी निजी विद्यालयों को चुनौती दे सकते हैं।





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