⭕बच्चों के निवाले पर डाका?!..मिड-डे मील की रकम में गड़बड़ी का आरोप, प्रधानाचार्य निलंबित
‼️गुमनाम पत्र ने खोली भ्रष्टाचार की पोल‼️
⭕बच्चों के निवाले पर डाका?!..मिड-डे मील की रकम में गड़बड़ी का आरोप, प्रधानाचार्य निलंबित

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
अक्टूबर बुधवार 7-10-2026
ग़ाज़ीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां जिस निवाले के सहारे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाला गरीब परिवार का बच्चा अपना पेट भरता है, अगर उसी निवाले के पैसों में बंदरबांट के आरोप लगें तो सवाल सिर्फ कुछ हजार या लाख रुपये का नहीं रह जाता, सवाल बच्चों के हक और व्यवस्था की नीयत पर खड़ा होता है।
गाजीपुर के देवकली ब्लॉक के पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय बरहपुर से सामने आया मामला भी कुछ ऐसा ही है। यहां एक गुमनाम पत्र ने शिक्षा विभाग से लेकर गांव तक खलबली मचा दी। हैरानी की बात यह रही कि यह पत्र किसी अधिकारी के पास नहीं, बल्कि गांव के करीब दर्जनभर लोगों के पास रजिस्टर्ड डाक से पहुंचा। लिफाफे पर भेजने वाले का नाम नहीं था, लेकिन अंदर जो कुछ लिखा था, उसने लोगों को चौंका दिया। पत्र में विद्यालय में मिड-डे मील के लिए आने वाली धनराशि में पिछले कई वर्षों के दौरान कथित गड़बड़ी का विवरण दिया गया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि पत्र के साथ बैंक स्टेटमेंट की प्रतियां भी लगाई गई थीं। आरोप था कि मिड-डे मील के खाते से रकम विद्यालय में कार्यरत एक शिक्षामित्र की मां के खाते में ट्रांसफर की गई।
यानी गुमनाम पत्र सिर्फ आरोपों का पुलिंदा नहीं था, बल्कि उसके साथ बैंक लेनदेन का कथित दस्तावेज भी था। पत्र गांव के लोगों के हाथों से निकलकर मीडिया तक पहुंचा और खबरें सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया।
मामला सामने आने के बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कथित रूप से 4 लाख 63 हजार रुपये संबंधित बैंक खाते में वापस जमा करा दिए। लेकिन विभाग ने इसे मामले का समाधान नहीं माना। मीडिया में खबर आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच में प्रथम दृष्टया प्रधानाचार्य की भूमिका सामने आने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। अब विभाग बैंक से वास्तविक लेनदेन और वायरल पत्र में दिए गए बैंक स्टेटमेंट का मिलान करा रहा है। जांच में यदि अन्य लोग भी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई है।





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