‼️तेजस युवती कार्यक्रम में गूंजी नारी शक्ति की बात!..संगीता बलवंत बोलीं- महिला-पुरुष एक रथ के दो पहिए‼️
‼️तेजस युवती कार्यक्रम में गूंजी नारी शक्ति की बात!..संगीता बलवंत बोलीं- महिला-पुरुष एक रथ के दो पहिए‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
अक्टूबर गुरुवार 8-10-2026
गाज़ीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर महिला जेन जी के द्वारा इन दिनों दिल्ली में किए गए प्रोटेस्ट के दौरान कई तरह के नए-नए नारे लगाए गए और उन नारो के माध्यम से पुरुष समाज को दोषी बताया गया वहीं अब इसको लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के द्वारा गाजीपुर में तेजस युवती कार्यक्रम का आयोजन किया गया और इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद डॉक्टर संगीता बलवंत तो वहीं विशिष्ट अतिथि आरएसएस के संपर्क प्रमुख मनोज कुमार रहे और इस दौरान कार्यक्रम में शामिल हुई किशोरियों और युवतियों को उनके अतीत और भारत की महिलाओं के इतिहास के बारे में जानकारी दिया गया और बताया गया कि भारत में बहुत सारी ऐसी महिलाएं रही हैं जो खुद स्वतंत्र रूप से राज किया है और अंग्रेजो और विदेशी शासको को भगाने तक का काम किया है।
कार्यक्रम को लेकर राज्यसभा सांसद डॉक्टर संगीता बलवंत से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से भारत के नारियों जिसमें सीता सावित्री महारानी लक्ष्मी बाई जैसी बहुत सारी नारियां जिसमें महारानी लक्ष्मीबाई समेत अन्य महिला भी है और उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए इस राष्ट्र की सेवा करनी है वही जेन जी यूवतियों के द्वारा दिल्ली में प्रोटेस्ट के दौरान जिस तरह से नारो का प्रयोग किया गया है इस सवाल पर जब उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि महिला और पुरुष एक रथ के दो पहिए हैं और दोनों पहियों को सामान्य रूप से रहना आवश्यक है तभी यह दुनिया और सृष्टि चलेगी और उनकी सहभागिता से ही यह समाज और सृष्टि चलेगी।
इस दौरान जब उनसे बात किया गया कि हमारे यह खुद दे रही हैं या फिर उनके पीछे कोई अदृश्य शक्ति है इस पर उन्होंने कहा कि कुछ अदृश्य शक्तियां या कुछ ऐसे कुचक्र रचे जा रहे हैं जो समय-समय पर देश का विभाजन या फिर स्त्री पुरुष के रिश्ते को लेकर और भेद कर कर राष्ट्र को बांटने का कार्य करते हैं लेकिन भारत के लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि यहां के लोगों में ऐसी जागरूकता समय हुई है और वह अपने शक्ति को विखंडित नहीं करेंगे और दोनों मिलकर 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का काम करेंगे।





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