⭕डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को!..ज्ञापन देने से पहले ही, छात्र नेताओं को पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट
‼️विरोध नहीं,सुविधाओ की मांग थी...‼️
⭕डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को!..ज्ञापन देने से पहले ही, छात्र नेताओं को पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट

किरण नाई वरिष्ठ पत्रकार
सितंबर शनिवार 26-9-2026
गाज़ीपुर: खबर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के गाज़ीपुर आगमन पर महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं एवं जनसमस्याओं से अवगत कराने व ज्ञापन सौंपने जा रहे छात्र प्रतिनिधियों को पुलिस प्रशासन द्वारा सुबह ही उनके आवास पर नज़रबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया। पीजी कॉलेज, गाज़ीपुर के पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय के आवास पर भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें और उनके साथी छात्र प्रतिनिधियों प्रद्युम्न सिंह यादव राजन, आकाश चौधरी एवं सतीश चौधरी को घर में ही कैद कर दिया गया।
पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने कहा कि गाज़ीपुर की जनता को केवल 'रिफरल सेंटर' नहीं, बल्कि एक मुकम्मल और संपूर्ण इलाज प्रदान करने वाला मेडिकल कॉलेज चाहिए। हम जनप्रतिनिधि और मंत्री जी को क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर मांग पत्र में समस्या दिखाने जा रहे थे, लेकिन पुलिस के बल पर हमारी आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई है। तानाशाही के दम पर जनहित की माँगों को रोका नहीं जा सकता।
छात्र नेता प्रद्युम्न सिंह यादव राजन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। जब ज़िले के मुख्य अस्पताल में दवाएँ, अल्ट्रासाउंड और इमरजेंसी सुविधाएँ ही नहीं मिलेंगी, तो गरीब जनता कहाँ जाएगी? सरकार स्वास्थ्य का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन धरातल पर जनता इलाज के लिए भटक रही है।
छात्र नेता आकाश चौधरी एवं सतीश चौधरी ने कहा कि प्रशासन का यह रवैया पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। जनसमस्याओं को लेकर ज्ञापन देना हमारा संवैधानिक अधिकार है। हमें हाउस अरेस्ट करके सरकार अपनी विफलता छुपाना चाहती है, लेकिन हम गाज़ीपुर के छात्र और नागरिक समाज के हक की लड़ाई लगातार लड़ते रहेंगे।
ज्ञापन में शामिल प्रमुख 12 सूत्रीय माँगें:
ट्रॉमा सेंटर (गोरा बाज़ार) का पूर्ण संचालन: करोड़ों की लागत से निर्मित बंद पड़े ट्रॉमा सेंटर को 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों और वेंटिलेटर सुविधाओं के साथ तुरंत चालू किया जाए, ताकि क्रिटिकल मरीजों को बीएचयू (BHU) न भागना पड़े।
इमरजेंसी में वरिष्ठ डॉक्टरों की उपस्थिति: पुरुष अस्पताल की इमरजेंसी केवल जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चल रही है। यहाँ दिन एवं रात की ड्यूटी में वरिष्ठ (सीनियर) डॉक्टरों की 24 घंटे उपस्थिति अनिवार्य की जाए।
सुपर-स्पेशलिटी ओपीडी व सातों दिन संचालन: गंभीर रोगों के उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों की पूरे सप्ताह (सातों दिन) ओपीडी ड्यूटी सुनिश्चित की जाए, जिससे मरीजों को बाहर या प्राइवेट अस्पतालों में न जाना पड़े।
रेडियोलॉजिस्ट नियुक्ति व ओपीडी अल्ट्रासाउंड: बंद पड़े ओपीडी अल्ट्रासाउंड को शुरू करने हेतु स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए।
महिला अस्पताल में पैथोलॉजी व अल्ट्रासाउंड व्यवस्था: महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड व समर्पित लैब न होने से गर्भवती महिलाओं को दूर भटकना पड़ता है; परिसर में ही समर्पित पैथोलॉजी व अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था हो।
24 घंटे सीटी स्कैन, एमआरआई व जाँचें: मरीजों की सुविधा हेतु सीटी स्कैन, एमआरआई (MRI) एवं अल्ट्रासाउंड जैसी प्रमुख जाँचें 24 घंटे (24x7) चालू रखी जाएँ।
दवाओं की शत-प्रतिशत उपलब्धता: आवश्यक व जीवनरक्षक दवाओं की किल्लत दूर कर मुख्य स्टोर व जन औषधि केंद्र पर सभी दवाएँ अस्पताल में ही उपलब्ध कराई जाएँ।
ऑपरेशन थिएटर (OT) का सातों दिन संचालन: केवल सप्ताह में 1-2 दिन ऑपरेशन की व्यवस्था समाप्त कर ऑपरेशन थिएटर को सातों दिन पूर्णतः क्रियाशील रखा जाए।
डायलिसिस बेडों का विस्तार: वर्तमान में मात्र 25 डायलिसिस बेड होने से लंबी वेटिंग रहती है, जनहित में बेडों की संख्या बढ़ाकर 50 की जाए।
ALS एम्बुलेंस, शव वाहन व रखरखाव: एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस व शव वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए तथा अस्पताल की खराब लिफ्ट व जाँच मशीनों को तुरंत ठीक कराया जाए।
सुरक्षित पार्किंग व सुरक्षा व्यवस्था: वाहन चोरी व जाम रोकने हेतु पुरुष व महिला अस्पताल परिसर के बाहर व्यवस्थित पार्किंग स्टैंड व सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएँ।
पेयजल, स्वच्छता व तीमारदार सुविधाएँ: खराब आरओ/पेयजल संयंत्रों व शौचालयों की मरम्मत कराई जाए तथा भर्ती मरीजों के तीमारदारों के लिए स्वच्छ स्नानघर व विश्राम स्थल बनाए जाएँ।





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