‼️यूसुफपुर से 60 कांवड़ियों का जत्था रवाना..120 किमी पैदल चलकर करेंगे बाबा बैजनाथ का जलाभिषेक‼️
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‼️यूसुफपुर से 60 कांवड़ियों का जत्था रवाना..120 किमी पैदल चलकर करेंगे बाबा बैजनाथ का जलाभिषेक‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
अगस्त रविवार 2-8-2026
गाजीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर श्रावण मास की पावन बेला में जिले के ग्राम पंचायत यूसुफपुर से रविवार को पारंपरिक कांवड़ यात्रा का भव्य शुभारंभ हुआ। वैदिक परंपरा के अनुसार श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना का सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है। इसी आस्था और परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 1970 से चली आ रही कांवड़ यात्रा के तहत इस वर्ष 60 श्रद्धालुओं का बोलबम जत्था पूरे धार्मिक उत्साह के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुआ।

पिछले एक दशक से इस यात्रा का नेतृत्व वरिष्ठ समाजसेवी एवं प्रधान पद के उम्मीदवार कमलाकर सिंह "झब्बू" (अवकाश प्राप्त सूबेदार, भारतीय सेना) के मार्गदर्शन में नवयुवक बोलबम कांवड़िया संघ द्वारा किया जा रहा है। यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं ने गांव के प्रमुख देवस्थलों टंडा वीर बाबा "टंडेश्वर महादेव" धाम, झारखंडे महादेव धाम तथा बंशीधर ब्रह्म बाबा के मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कांवड़ियों के प्रस्थान के दौरान पूरा गांव शिवमय हो उठा। गांव की महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनके साथ चले। भक्तिमय वातावरण और शिवभक्ति के रंग में रंगा गांव आकर्षण का केंद्र बना रहा।
यात्रा में प्रमुख रूप से ओमप्रकाश गुप्ता, जितेंद्र वर्मा, अनिल दुबे, अजय सिंह, पंकज दुबे, कप्तान दुबे, श्याम निषाद, कन्हैया गुप्ता, पधोरन गुप्ता, आकाश सिंह, धनंजय वर्मा, तीर्थराज सहित कुल 60 बोलबम श्रद्धालु शामिल हैं।
आयोजकों ने बताया कि सभी श्रद्धालु पहले काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी में गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद बिहार के सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल कांवड़ में भरकर लगभग 120 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर, झारखंड) पहुंचेंगे, जहां भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना करेंगे।
ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं की मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए भगवान भोलेनाथ से सभी कांवड़ियों की सुरक्षित यात्रा एवं सफल जलाभिषेक की प्रार्थना की। इस दौरान पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिली।





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