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मौजूदा अधिकारियों के नवाचार और!...सांसदों से तालमेल बैठाकर अफीम फैक्ट्री के अस्तित्व बचाने के लिए किया जा रहा है पहल

  • alpayuexpress
  • Oct 14
  • 3 min read

मौजूदा अधिकारियों के नवाचार और!...सांसदों से तालमेल बैठाकर अफीम फैक्ट्री के अस्तित्व बचाने के लिए किया जा रहा है पहल

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सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ


अक्टूबर मंगलवार 14-10-2025

गाजीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर 1820 में अंग्रेजों के द्वारा स्थापित किया गया अफीम एवं क्षारोद कारखाना जहां पर राजस्थान के नीमच व अन्य प्रान्तों से कच्ची अफीम लाकर यहां इसका ट्रीटमेंट कर दवा के निर्माण के लिए विदेशों को भेजी जाती है लेकिन यह फैक्ट्री 1820 में स्थापित होने के कारण और अब तक उसके संयंत्रों में उच्चीकरण नहीं होने के कारण पुराने मशीनों से अब प्रोडक्शन की बड़ी कमी हो गई है जिसके चलते अब इस अफीम फैक्ट्री पर ग्रहण लगने की उम्मीद लग रही है इसी को लेकर महाप्रबंधक दौलत कुमार के पहल पर यहां के फैक्ट्री में नई मशीन का उच्चीकरण करके इसके उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए राज्यसभा सांसद के माध्यम से वित्त मंत्रालय तक यहां की समस्या को रखने के लिए पहल किया गया जिसको लेकर आज राज्यसभा सांसद डॉक्टर संगीता बलवंत ने अफीम एवं क्षारोद कारखाने का निरीक्षण किया और यह जानने का प्रयास किया कि इस फैक्ट्री में आखिर ऐसी कौन-कौन सी कमी है जिसे उच्चीकरण कराकर उसका प्रोडक्शन बढ़ाया जा सके।


निरीक्षण के उपरांत डॉक्टर संगीता बलवंत ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि क्या फैक्ट्री गाज़ीपुर की धरोहर है जो पूरे विश्व में जाना जाता है लेकिन इस फैक्ट्री में कुछ समस्याएं आ रही थी जिसको लेकर फैक्ट्री के महाप्रबंधक ने संपर्क किया था कि यहां की समस्याओं को केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाए उन्होंने महाप्रबंधक का धन्यवाद दिया कि बंद होने के कगार पर पहुंच चुकी अफीम फैक्ट्री को बचाने के लिए उन्होंने पहला किया क्योंकि अफीम की खेती पहले ही बंद हो चुकी है ऐसे में उनकी पहल है कि गाजीपुर में कैसे अफीम की खेती हो और इस फैक्ट्री को बचाया जा सके।


उन्होंने बताया कि पूर्व में यहां पर अफीम का एक व्यापक बाजार था जिससे लोगों को रोजगार भी मिलता था ऐसे में इसे करने के लिए एक पहल किया जाएगा।


उन्होंने बताया कि अंग्रेजो के समय 1820 का यह फैक्ट्री है जबकि 1700 में मौजूद जेल में अफीम की फैक्ट्री हुआ करती थी बाद में यहां पर ट्रांसफर होकर आई जो कई बीघा में फैली हुई है लेकिन मौजूदा समय में यहां के मजदूर और अन्य स्टाफ की बड़ी कमी है यहां पर प्रोडक्शन की कमी के चलते जो पहले विभिन्न देशों में यहां की अफीम को भेजा जाता था उसमें भी कमी आ गई है। ऐसे में अब यहां की समस्या को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने रखने का एक प्रयास किया जाएगा ताकि गाजीपुर की धरोहर को बचाया जा सके।


इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की जो सरकार थी इस फैक्ट्री के ऊंची कारण पर कोई ध्यान नहीं दिया था साथ ही अफीम की खेती जो बंद हो रही थी उसे आगे कैसे बढ़ाया जाए इस पर भी थोड़ा संज्ञान नहीं लिया।


उन्होंने बताया कि कुछ विभागिय अधिकारियों और पूर्व सरकार की अनदेखी के कारण यहां की बहुत सारी मशीन नीमच चली गई थी जिसके वजह से यहां का काम ठंडा पड़ गया था वही अब अधिकारी नवाचार के तहत काम करना स्टार्ट किए हैं इसके प्रयास से कुछ मशीन नीमच से वापस मंगाई गई है। इस दौरान उन्होंने कहा कि अफीम की खेती जो यहां पर खत्म हो चुकी है लेकिन उसके लिए भी एक पहल करने का प्रयास किया जाएगा ताकि लोगों को रोजगार मिल सके।

 
 
 

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