‼️बासफोर-मुसहर समाज ने उठाई आवाज!..जमीन और पक्के मकान के साथ बराबरी के सम्मान की मांग‼️
‼️बासफोर-मुसहर समाज ने उठाई आवाज!..जमीन और पक्के मकान के साथ बराबरी के सम्मान की मांग‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
सितंबर बुधवार 16-9-2026
ग़ाज़ीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर आजादी को 76 वर्ष बीत चुके हैं। देश विकास, डिजिटल इंडिया और सामाजिक समानता की बात कर रहा है, लेकिन समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े कुछ लोग आज भी अपने हिस्से की जमीन, पक्के घर और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसी दर्द और वर्षों की उपेक्षा को आवाज देने के लिए बासफोर, मुसहर और अन्य वंचित-महादलित समुदायों से जुड़े लोग सोमवार को एकजुट होकर गाजीपुर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर अपने अधिकारों और सम्मान की मांग की।
समाज के लोगों का कहना है कि शासन की ओर से आरक्षण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की व्यवस्था होने के बावजूद शिक्षा और जागरूकता के अभाव में उनका समुदाय आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर है। आरोप है कि जानकारी के अभाव में सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ भी जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पाता।
प्रदेश अध्यक्ष सोनू बासफोर ने कहा कि उनके समाज के अधिकांश लोगों के पास न तो अपनी जमीन है और न ही पक्का घर। कई परिवार आज भी सड़क किनारे, झोपड़ियों में या गांवों की बस्तियों से अलग रहने को मजबूर हैं। पेट पालने के लिए लोग बांस-बल्लियों से सामान बनाने और श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार से जुड़े कार्य करते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि समाज के लिए जरूरी माने जाने वाले काम करने के बावजूद उन्हें सम्मान की नजर से नहीं देखा जाता और कथित रूप से छुआछूत का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सड़क किनारे झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों की जिंदगी हमेशा खतरे में रहती है। कई बार तेज रफ्तार और बेकाबू वाहन उनकी झोपड़ियों तक पहुंच जाते हैं और हादसों में जान तक चली जाती है। ऐसे परिवारों के लिए गांवों में उपलब्ध बंजर या सरकारी भूमि का चिन्हांकन कर आवासीय पट्टा और पक्के मकान की व्यवस्था करने की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने सबसे बड़ा सवाल समाज के सामने रखा,जब हम हिंदू समाज के धार्मिक और सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, तो हमें बराबरी का सम्मान क्यों नहीं मिलता? हमें अछूत की नजर से क्यों देखा जाता है? राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रद्युम्न पहलवान ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी यदि किसी समुदाय को अपने अस्तित्व, सम्मान और अधिकार के लिए सड़क पर उतरना पड़े, तो यह सामाजिक समानता के दावों पर गंभीर सवाल है। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सम्मान, बराबरी, शिक्षा, जमीन और सुरक्षित आवास के अधिकार के लिए है। इस दौरान इन लोगों ने मांग किया कि यदि हमें हिंदू समाज में सम्मान नहीं मिल पाता है हमारे साथ छुआछूत जैसा व्यवहार किया जाएगा तो हम आने वाले समय में अपना धर्म परिवर्तन भी कर सकते हैं।





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