‼️पिता के वचन की मर्यादा के लिए!..वन जाने को तैयार हुए श्रीराम,सीता और लक्ष्मण ने भी चुना साथ‼️
‼️पिता के वचन की मर्यादा के लिए!..वन जाने को तैयार हुए श्रीराम,सीता और लक्ष्मण ने भी चुना साथ‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
अक्टूबर सोमवार 12-10-2026
गाजीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर अति प्राचीन श्रीरामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वावधान में शनिवार की शाम हरिशंकरी स्थित श्रीराम चबूतरा पर रामलीला के पांचवें दिन राजा दशरथ-कैकेयी-श्रीराम संवाद और विदाई मांगने की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। राजा भैया आदर्श रामलीला मंडल के कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से प्रसंग को इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक भावुक हो उठे। लीला से पूर्व कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी सहित पदाधिकारियों ने आरती-पूजन किया। लीला के प्रसंग में दिखाया गया कि जब महारानी कैकेयी को पता चलता है कि राजा दशरथ अपने ज्येष्ठ पुत्र श्रीराम को अयोध्या का राजपाट सौंपने जा रहे हैं, तो दासी मंथरा उन्हें देवासुर संग्राम के दौरान राजा दशरथ द्वारा दिए गए दो वरदानों की याद दिलाती है। मंथरा कैकेयी को समझाती है कि अब समय आ गया है कि वह अपने दोनों वरदान मांग लें। उसकी बातों में आकर कैकेयी कोपभवन में चली जाती हैं और राजसी वस्त्र-आभूषण त्यागकर जमीन पर लेट जाती हैं।
महारानी कैकेयी के कोपभवन में जाने की सूचना पर राजा दशरथ उन्हें मनाने पहुंचते हैं। कैकेयी पुराने वचन की याद दिलाते हुए दो वरदान मांगती हैं। पहला वरदान भरत को अयोध्या का राजा बनाने और दूसरा श्रीराम को तपस्वी के वेश में 14 वर्ष का वनवास देने का होता है। यह सुनते ही राजा दशरथ स्तब्ध रह जाते हैं। वह कैकेयी से दूसरा वरदान बदलने की विनती करते हैं, लेकिन कैकेयी अपने निर्णय पर अडिग रहती हैं। पुत्र वियोग की कल्पना से व्याकुल राजा दशरथ राम-राम कहते हुए मूर्छित हो जाते हैं। इसके बाद गुरु वशिष्ठ और श्रीराम को राजा दशरथ की स्थिति की जानकारी मिलती है। श्रीराम पिता के पास पहुंचकर उनसे कारण पूछते हैं। कैकेयी उन्हें दोनों वरदानों के बारे में बताती हैं। श्रीराम पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए सहर्ष वनवास स्वीकार कर लेते हैं। वह माता कौशल्या से आज्ञा लेने पहुंचते हैं। श्रीराम के वन जाने की बात सुनकर माता सीता और भाई लक्ष्मण भी उनके साथ जाने का निर्णय लेते हैं। इसके बाद श्रीराम, सीता और लक्ष्मण तपस्वी वेश धारण कर राजा दशरथ और माता कैकेयी से विदाई लेने पहुंचते हैं। इस मार्मिक दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। राम वनगमन के प्रसंग के दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के गगनभेदी उद्घोष से लीला स्थल को गुंजायमान कर दिया। इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. गोपाल जी पांडेय, कृष्ण मुरारी केडिया, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, संयुक्त मंत्री लक्ष्मी नारायण, उपमंत्री लव कुमार त्रिवेदी, मेला प्रबंधक मनोज कुमार तिवारी, मेला उपप्रबंधक मयंक तिवारी, कोषाध्यक्ष बाबूरोहित अग्रवाल, अशोक कुमार अग्रवाल, अजय कुमार अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल, प्रमोद कुमार गुप्ता, अजय पाठक, राजेश प्रसाद, कृष्णांश त्रिवेदी, बाल गोविंद त्रिवेदी, राजकुमार शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।





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