‼️खाद संकट से राहत दिलाएगी ढैचा की खेती!..मुफ्त बीज देकर किसानों को आत्मनिर्भर बना रहा कृषि विभाग‼️
- alpayuexpress
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‼️खाद संकट से राहत दिलाएगी ढैचा की खेती!..मुफ्त बीज देकर किसानों को आत्मनिर्भर बना रहा कृषि विभाग‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
जुलाई शुक्रवार 3-7-2026
गाज़ीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर खाद और यूरिया की लगातार बढ़ती हुई मांग को देखते हुए अब कृषि विभाग के द्वारा किसानों को हरी खाद का उत्पादन खुद के खेतों में करने और इसका प्रयोग अगले फसल में करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है जिसके लिए ढैचा की खेती की बात कही जा रही है और इसको लेकर विभाग के द्वारा निशुल्क बीज का भी वितरण किया जाता है यह खेती मात्र 40 दिन की होती है और 40 दिन के अंदर ही किसान इसकी फसल को खेतों के अंदर ही जोत कर मिला देने पर यह हरी खाद का रूप ले लेता है और फसलों को लाभ पहुंचता है

किसानों के खेतों में फसल के लिए उर्वरक की मांग लगातार बढ़ती जा रही है और इसी मांग को लेकर कभी-कभी किसानों को रात-रात भर जाकर लंबी-लंबी लाइन भी लगाने को मजबूर होना पड़ता है फिर भी उन्हें समय से खाद उपलब्ध नहीं हो पता वहीं अब फार्मर आईडी बन जाने के बाद अब उनके खेतों के लिए उर्वरक की मात्रा भी निश्चित कर दी गई है जिससे किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही है इन्हीं सब समस्याओं को देखते हुए कृषि विभाग किसानों को हरी खाद के लिए ढैचा की खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है जो अपने लगाने के 40 दिन के अंदर ही पूर्ण रूप से तैयार हो जाता है जिसके बाद किसान उसकी जुताई कर जमीन में मिला दे तो यह हरी खाद उनकी अगली फसल के लिए काफी लाभदायक होता है और इन्हीं सबको देखते हुए कृषि विभाग ढैचा का बीज भी पिछले दिनों वितरित किया था जिसको लेकर जमानिया इलाके के किसानों ने इसमें अपने उत्सुकता दिखलाई थी और इसकी खेती बाड़ी क्षेत्र में किया था और इन्हीं सब को देखने के लिए संयुक्त कृषि निदेशक भी जमानिया इलाके के ढैचा के खेती वाले खेत में पहुंचकर निरीक्षण किया था और संतुष्टि जताई थी इसको लेकर जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि किसानों को अब रासायनिक खाद के बजाय हरी खाद पर आना चाहिए जिससे उनके खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और पर्यावरण भी संतुलित रहेगा।





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