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‼️एनजीटी मानकों की उड़ रही धज्जियां‼️ ⭕तालाबों में पानी नहीं,राख के ढेर!..गाजीपुर में प्रदूषण से पशु-मानव दोनों संकट में

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  • 1 day ago
  • 3 min read

‼️एनजीटी मानकों की उड़ रही धज्जियां‼️

⭕तालाबों में पानी नहीं,राख के ढेर!..गाजीपुर में प्रदूषण से पशु-मानव दोनों संकट में

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ


अप्रैल मंगलवार 7-4-2026

गाज़ीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के अनुसार, फैक्ट्री से निकली राख का निपटारा वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए। राख को खुले में फेंकने, निचले इलाकों में डालने या परिवहन के दौरान असुरक्षित रखने पर सख्त पाबंदी है। इसे सुरक्षित भंडारण, रीयूज (जैसे सीमेंट उद्योग में), और वायु प्रदूषण नियंत्रण (जैसे धूल दमन) के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। बावजूद इसके गाजीपुर में एनजीटी के इस मानक की लगातार धज्जियां उड़ती हुई दिख रही है और यह नजारा गाजीपुर के फ़तेहुल्लापुर गांव में स्थित सुखबीर एग्रो इंडस्ट्रीज के द्वारा किया जा रहा है जिससे आसपास के ग्रामीण और राहगीर पिछले काफी दिनों से परेशान है बावजूद उनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है।

गाजीपुर के फ़तेहुल्लापुर में सुखबीर एग्रो इंडस्ट्री के द्वारा पावर प्लांट के माध्यम से बिजली बनाने का काम पिछले काफी दिनों से किया जा रहा है जिसके लिए वह खेतों से निकले हुए भूसे और अन्य सामग्रियों का प्रयोग कर बिजली का उत्पादन तो करता है लेकिन इससे जो राख निकलती है उसका निस्तारण करने के बजाय फैक्टरी प्रशासन के द्वारा जगह-जगह फेंका जा रहा है खासकर उन स्थानों पर जहां पर खेत तालाब और अन्य जगह है खाली पड़ी होती हैं और वह सार्वजनिक जगह होती है उन स्थानों पर यह राह का ढेर लगा दे रहे हैं स्थिति यह हो गई है कि उनके राख से अब फैक्ट्री के आसपास के तालाब पोखरे भी पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं और उन पोखरों में पानी की जगह पर राख के ढेर देखने को मिल रहे हैं हालांकि फैक्टरी प्रशासन के द्वारा इस ढकने के लिए राख के ऊपर मिट्टी डालकर देखा जा सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्टरी प्रशासन के द्वारा फैक्ट्री में से निकले हुए राख को निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से करने के बजाय जहां तहां फेंक दिया जा रहा है कई स्थानों पर लोगों के घरों के पास भी फेंका गया है जिससे वहां के रहने वाले लोगों के साथ ही आने-जाने वाले राहगीर को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है इतना ही नहीं फैक्ट्री के चिमनी से निकलने वाले धुएं के कड़ लोगों के छतों पर कभी भी देखा जा सकता है इन लोगों का कहना है कि तालाब और पोखरों में रख के देर लग जाने के कारण जो थोड़े पानी बचे हुए हैं उन पानी को पीने से उनके पशु भी बीमारी की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

वीओ- वही इस पूरे मामले पर फैक्टरी प्रशासन से बात करने का प्रयास किया गया इलेक्ट्रिक फैक्टरी प्रशासन के द्वारा इस मामले पर बात करना उचित नहीं समझा वही अपर जिला अधिकारी दिनेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आप लोगों के द्वारा जो बातें बताई गई है इस पूरी बातों की जांच कराई जाएगी साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इन राख को कैसे सही जगह पर निस्तारण कराया जाए वही पशुओं के द्वारा आसपास के तालाबों के पानी पीने से उनके दुग्ध क्षमता में कमी आ रही है इस पर उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है सुनिश्चित किया जाएगा कि उसके फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं को या राख को कैसे फिल्टर किया जाए और यदि राख फैलाई जा रहे हैं तो वैधानिक कार्रवाई जो किया जा सकता है उसे भी किया जाएगा। वहीं इस पूरे मामले में पत्रकारों द्वारा जब फैक्ट्री प्रशासन से जानकारी लेनी चाहिए तो उन्होंने जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा।

 
 
 

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