‼️26 मई के बाद गांवों का क्या होगा?!..ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म, चुनाव गायब,सरकार पर अधिकार छीनने का आरोप‼️
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‼️26 मई के बाद गांवों का क्या होगा?!..ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म, चुनाव गायब,सरकार पर अधिकार छीनने का आरोप‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
अप्रैल गुरुवार 16-4-2026
गाज़ीपुर:-ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर भारत सरकार ग्राम प्रधानों को उनके अधिकार से वंचित करने और भारतीय जनता पार्टी समाजवादियों के डर से चुनाव समय से नही करने के बात चर्चा का विषय है। पूरे प्रदेश में 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो रहा है लेकिन अभी तक पंचायत चुनाव होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है इसके बाद अब समाजवादी पार्टी सरकार में पर्यटन मंत्री रहे ओम प्रकाश सिंह ने पंचायती राज व्यवस्था में मौजूदा सरकार के द्वारा चुनाव न कराने और पंचायत चुनाव का कार्यकाल खत्म होने पर ग्राम प्रधानों को प्रभार दिलाए जाने को लेकर आज एक प्रेस वार्ता किया और प्रेस वार्ता के माध्यम से उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को घेरने का काम किया।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज राजनीति में शिशु स्थल है और भारतीय जनता पार्टी समाजवादियों के डर से ना चुनाव समय से कराया और एक चर्चा चल रही है की 15वां और 16वां वित खत्म हो गया और अब 17वां वित लगने वाला है ऐसे में उनका 10% बढ़ाने वाला फंड भी अभी तक नहीं बढ़ाई हैं वहीं मनरेगा में जो मौजुदा समय में जी राम जी है लेकिन वह कहां है पता ही नहीं चल रहा है क्योंकि अभी संशोधित एक्ट अभी तक नहीं आया।
हमारे पूर्वजों ने गांव के महत्व को समझा और उसी का देन है कि आज शहरीकरण बढा है फिर भी गांव में आज भी ग्रामीण कल्चर सबसे अधिक है ऐसे समय में हम मांग करेंगे की भारत सरकार जो हमारे चुने हुए गांव के प्रतिनिधि और मेंबर हैं क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य इनका बजट बढ़ाया जाए और प्रधानों को उनके अधिकार से वंचित न किया जाए प्रधान जनप्रतिनिधि है और लोकतंत्र का शिशु स्थल है उसे बर्बाद करना और खत्म करना गलत है क्योंकि यह बड़ा ही मेहनत से आया है एक तरफ आप कह रहे हैं कि महिलाओं का रिजर्वेशन बढा है तो वही है हमारी समाजवादी पार्टी सरकार में मुलायम सिंह यादव ने उस वक्त महिलाओं के लिए 33% का आरक्षण दिया था इतना ही नहीं प्रधानों को तनख्वाह से लेकर मानदेय तक और गांव में किसी को सांप काट ले उसकी बकरी मर जाए या फिर किसी भी तरह की समस्या आने पर उन्हें भी अनुदान देने का कार्य शुरू किया था।

