‼️20 साल से अल्प मानदेय पर काम कर रहे!..तकनीकी सहायकों ने उठाई आवाज,सौंपा ज्ञापन‼️
‼️20 साल से अल्प मानदेय पर काम कर रहे!..तकनीकी सहायकों ने उठाई आवाज,सौंपा ज्ञापन‼️

किरण नाई वरिष्ठ पत्रकार
सितंबर मंगलवार 22-9-2026
गाजीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर मनरेगा/वीबीजी रामजी योजना के तहत कार्यरत जिले के तकनीकी सहायकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन खंड विकास अधिकारी के माध्यम से सौंपा। तकनीकी सहायकों ने कहा कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से बेहद कम मानदेय में विभिन्न परिस्थितियों के बीच अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। लंबे समय से मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने और फील्ड कार्य में होने वाले खर्च के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में तकनीकी सहायकों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में महंगाई लगातार बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद उनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई। तकनीकी सहायक फील्ड कर्मचारी के रूप में ग्राम पंचायतों में संचालित परियोजनाओं के इस्टीमेशन तैयार करने और उनके सुपरविजन का कार्य करते हैं। इसके लिए उन्हें प्रतिदिन विभिन्न ग्राम पंचायतों में जाना पड़ता है। तकनीकी सहायकों के अनुसार इस कार्य में आने-जाने समेत अन्य खर्च पर औसतन करीब छह हजार रुपये प्रतिमाह खर्च हो जाता है, जिसे उन्हें अपने अल्प मानदेय से ही वहन करना पड़ता है। इससे परिवार के भरण-पोषण में भी परेशानी उत्पन्न हो रही है।
तकनीकी सहायकों ने अप्रैल 2026 से जून 2026 तक का लंबित मानदेय भी दिलाए जाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने अपने मानदेय को जूनियर इंजीनियर के मूल वेतन के समान 45 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग रखी है।
ज्ञापन में तकनीकी सहायकों ने ईपीएफ से संबंधित राशि की कटौती का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि अप्रैल 2015 के मूल वेतन से जून 2026 तक की ईपीएफ कटौती की धनराशि उनके संबंधित JAN खाते में जमा कराई जाए, ताकि उन्हें इसका लाभ मिल सके।
तकनीकी सहायकों ने सरकार से अपनी मांगों पर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 26 सितंबर 2026 तक उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं किया जाता है तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। इसके तहत 28 सितंबर 2026 से लखनऊ स्थित ईको गार्डन में धरना-प्रदर्शन किए जाने की चेतावनी दी गई है। तकनीकी सहायकों का कहना है कि लंबे समय से कम मानदेय में कार्य करने के बावजूद वे ग्राम पंचायतों की विकास परियोजनाओं के तकनीकी कार्यों और निगरानी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी मांगों पर सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।





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