न्यायिक कार्य में बाधा बन रहा लेखपाल!...बार संघ जखनियां ने लेखपाल के खिलाफ की मोर्चाबंदी
- alpayuexpress
- Sep 17
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न्यायिक कार्य में बाधा बन रहा लेखपाल!...बार संघ जखनियां ने लेखपाल के खिलाफ की मोर्चाबंदी

किरण नाई ,वरिष्ठ पत्रकार
सितम्बर बुधवार 17-9-2025
गाज़ीपुर:- खबर गाजीपुर जिले से एक बड़ी ख़बर सामने आई है, जहाँ न्यायालय उप जिलाधिकारी न्यायालय जखनियां में रीडर के पद पर सम्बद्ध लेखपाल विपिन राम के खिलाफ अधिवक्ताओं ने आवाज़ बुलंद की है। मंगलवार को दी बार संघ जखनियां के अधिवक्ताओं ने आकस्मिक बैठक कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि विपिन राम की कार्यशैली और गतिविधियों से न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है, ऐसे में उन्हें न्यायालय कक्ष की गतिविधियों से दूर किया जाना चाहिए।
बैठक में उपस्थित अधिवक्ताओं का कहना था कि रीडर विपिन राम की अवांछनीय कार्यशैली से न केवल वादकारी बल्कि अधिवक्ता गण भी लगातार परेशान हो रहे हैं। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि उनकी गतिविधियाँ न्यायालय की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं और बार-बार ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं जिससे सुचारू रूप से न्यायिक कार्य करना कठिन हो रहा है।
बार संघ अध्यक्ष ने उठाई गंभीर आपत्ति:- बार संघ जखनियां के अध्यक्ष नेसार अहमद ने इस अवसर पर कहा कि इस संबंध में पूर्व में ही बार संघ ने उप जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए उचित कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय की मर्यादा और वादकारियों के हितों की रक्षा के लिए यह आवश्यक है कि विपिन राम को तत्काल प्रभाव से न्यायालय कार्य से असम्बद्ध किया जाए।
सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव:- बैठक में अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया कि न्यायालय में उत्पन्न गतिरोध को समाप्त करने और न्यायिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक है कि विपिन राम को न्यायालय कक्ष की किसी भी गतिविधि से अलग रखा जाए। अधिवक्ताओं ने उप जिलाधिकारी से यह भी मांग की कि इस विषय पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि अधिवक्ता और वादकारी बिना किसी दबाव या परेशानी के न्यायालयीन कार्यवाही को आगे बढ़ा सकें।
उप जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन:- बैठक के उपरांत अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षरित ज्ञापन तैयार कर उप जिलाधिकारी को सौंपने का निर्णय लिया। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो अधिवक्ता मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायिक कार्यों में किसी भी प्रकार की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिवक्ताओं का कहना था कि उनका उद्देश्य केवल न्यायालय की गरिमा बनाए रखना और वादकारियों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है। बैठक में बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में मांग की कि जिला प्रशासन और न्यायालय इस विषय पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय ले।







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