तेज सिंह मोटर ट्रेनिंग स्कूल पर लगा वसूली का आरोप!...ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा
- alpayuexpress
- Jul 11
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सिर्फ गाजीपुर में ही संभव है
तेज सिंह मोटर ट्रेनिंग स्कूल पर लगा वसूली का आरोप!...ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा

संतोष नाई वरिष्ठ पत्रकार
जुलाई शुक्रवार 11-7-2025
गाज़ीपुर:- खबर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर तेज सिंह मोटर ट्रेनिंग स्कूल द्वारा की जा रही मोटी वसूली और फर्जी पासिंग का मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। आरोप है कि इस ट्रेनिंग सेंटर द्वारा बिना वैध ड्राइविंग टेस्ट के ही अभ्यर्थियों को पास घोषित कर दिया गया, और इसके बदले उनसे ₹3000 से ₹6000 तक की वसूली की गई।
जानकारी के अनुसार, 13 मई 2025 को शासन की ओर से निर्देश जारी किए गए थे कि ड्राइविंग टेस्ट केवल आरटीओ और आरआई की मौजूदगी में ही मान्य होगा। परंतु तेज सिंह मोटर ट्रेनिंग स्कूल ने आरआई और एआरटीओ की अनुपस्थिति में ही सैकड़ों अभ्यर्थियों को पास कर दिया।
कई मामलों में तो न कोई ट्रैक टेस्ट हुआ, न कोई निगरानी। अभ्यर्थी केवल पैसे देकर लाइसेंस के लिए पास घोषित कर दिए गए।
"पासिंग की कीमत – ₹3000 से ₹6000"
लोगों से पता करने पर सामने आया कि सेंटर द्वारा ₹3000 से ₹6000 तक की अवैध वसूली की जा रही थी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यदि वे पैसे नहीं देते थे तो उन्हें जानबूझकर फेल कर दिया जाता था, भले ही वे कुशल ड्राइवर हों।
आरटीओ कार्यालय से जुड़े अधिवक्ता रोहित यादव ने बताया कि “ट्रेनिंग सेंटर में अभ्यर्थियों का मोबाइल बाहर रखवा लिया जाता है ताकि कोई रिकॉर्डिंग न हो सके। फिर अंदर उनसे सीधे पैसे की मांग की जाती है। न देने पर उन्हें फेल कर दिया जाता है।”
ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आए कई अभ्यर्थियों,गोलू यादव, लोगराज तिवारी, राहुल शर्मा, विवेक यादव,ने आरोप लगाया कि उनसे पैसे मांगे गए, और न देने पर जानबूझकर फेल कर दिया गया। वहीं, जयप्रकाश यादव, नागा, संतोष यादव सहित स्थानीय दुकानदारों ने भी पुष्टि की कि तेज सिंह मोटर ट्रेनिंग स्कूल के लोग खुलेआम पैसे वसूलते हैं, और इसे "सिस्टम का हिस्सा" बताकर जायज ठहराते हैं।
जिम्मेदार कौन?....इतनी बड़ी संख्या में फर्जी फाइलें कैसे पास हो गईं?
क्या किसी उच्च अधिकारी की मौन स्वीकृति थी?
शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जिले में इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह भ्रष्टाचार न सिर्फ युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है, बल्कि गाज़ीपुर की साख को भी ठेस पहुंचा सकता है।







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