‼️कर्ज और घटते कमीशन से परेशान!..बीसी सखियों ने जिलाधिकारी को बताई पीड़ा‼️
‼️कर्ज और घटते कमीशन से परेशान!..बीसी सखियों ने जिलाधिकारी को बताई पीड़ा‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
अक्टूबर शुक्रवार 16-10-2026
गाज़ीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कार्य करने वाली बीसी सखियां इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। मानदेय बंद होने, ट्रांजैक्शन पर मिलने वाले कमीशन और बैंकिंग कार्यों में आ रही समस्याओं को लेकर बीसी सखियों ने जिलाधिकारी से अपनी पीड़ा साझा की। एक दिन पूर्व मांगों से संबंधित पत्र सौंपने के बाद विकास भवन में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बीसी सखियों के साथ बैठक हुई। बीसी सखियों का कहना है कि उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन खुद उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। पहले वे पैनियरवाई संस्था के माध्यम से कार्य कर रही थीं, लेकिन संस्था का अनुबंध समाप्त होने के बाद फरवरी 2026 से नवीनीकरण नहीं हुआ। अब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से नया अनुबंध किए जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें 75 हजार रुपये तक का ऋण दिया गया है, जिस पर लगातार ब्याज बढ़ रहा है, जबकि आमदनी का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। उनका कहना है कि एक लाख रुपये के ट्रांजैक्शन पर 90 रुपये कमीशन मिलता था, लेकिन खाते में कमीशन आने के दौरान करीब 100 रुपये तक कटने की समस्या भी सामने आती है। इससे उनके लिए काम करना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन गया है।
बीसी सखियों के मुताबिक, शुरुआती छह महीने तक उन्हें चार हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिला, लेकिन इसके बाद भुगतान बंद हो गया। अब वे 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि केवल कमीशन के भरोसे परिवार चलाना मुश्किल है। वे बैंक कर्मचारियों की तरह सम्मान, महिला होने के नाते सुरक्षित कार्य वातावरण और नकदी की सुरक्षा की व्यवस्था भी चाहती हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2021 में चयनित बीसी सखियों को शुरुआती छह महीने तक चार हजार रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि दी गई थी। इसके बाद ट्रांजैक्शन के आधार पर कमीशन का प्रावधान रहा। फरवरी 2026 में कार्यदायी संस्था का अनुबंध समाप्त हो गया है और अब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से दोबारा अनुबंध की प्रक्रिया होनी है। बीसी सखियों की मांग केवल मानदेय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता से भी जुड़ी है। ऐसे में नए अनुबंध के साथ उनकी समस्याओं का समाधान ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने की इस पहल को नई मजबूती दे सकता है।





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