अमन-चैन का संदेश देकर!...जखनिया में अकीदत और सौहार्द के साथ मनाया गया ईद मिलादुन्नबी
- alpayuexpress
- Sep 5
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अमन-चैन का संदेश देकर!...जखनिया में अकीदत और सौहार्द के साथ मनाया गया ईद मिलादुन्नबी

किरण नाई ,वरिष्ठ पत्रकार
सितम्बर शुक्रवार 5-9-2025
गाजीपुर:-खबर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर स्थानीय तहसील जखनिया मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में ईद मिलादुन्नबी का पर्व अकीदत, हर्षोल्लास और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। कस्बे में बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें जखनिया ही नहीं बल्कि अलीपुर मदरा, गौरा खास, दामोदरपुर, मुडियारी, भुड़कुड़ा समेत कई गांवों के लोग भारी संख्या में शामिल हुए। वहीं शादियाबाद, बहरियाबाद, जलालाबाद, दुल्लहपुर, पहितिया बुजुर्गा, पदुमपुर और रामपुर कनुवान जैसे मुस्लिम बहुल कस्बों में भी बारावफात का पर्व बेहद गरिमा और सौहार्द के साथ मनाया गया।
त्योहार की निगरानी और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से उप जिलाधिकारी जखनिया, तहसीलदार, क्षेत्राधिकारी और कोतवाल भुड़कुड़ा सहित पुलिस-प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहा। स्थानीय लोगों ने भी पूरी जिम्मेदारी के साथ सहयोग किया, जिससे पर्व बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुआ।
जुलूस की सबसे खास बात यह रही कि इसमें मुस्लिम समाज के साथ-साथ हिंदू समाज के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने मिलकर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। जुलूस में शामिल लोग हाथों में हाथ डालकर, एक-दूसरे को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए आगे बढ़ते रहे। जगह-जगह जुलूस का स्वागत पुष्पवर्षा और शरबत-मीठाई बांटकर किया गया।
ईद-ए-मिलाद-उन-नबी इस्लामिक कैलेंडर के रबी-उल-अव्वल महीने की 12वीं तारीख को मनाया जाता है। इस दिन को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। लोग अपने घरों को रोशनी और सजावट से संवारते हैं, मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं और दरगाहों पर चादर चढ़ाते हैं। दिनभर अल्लाह की इबादत, नात-ए-शरीफ का पाठ और धार्मिक जुलूस के आयोजन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया।
गांव और कस्बों में जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे। बच्चों और युवाओं ने हाथों में हरे झंडे और तख्तियां लेकर नबी-ए-करीम की शान में नारे बुलंद किए। महिलाएं भी अपने घरों और मस्जिदों को सजाने में आगे रहीं।
ईद मिलादुन्नबी के इस पावन अवसर पर प्रशासनिक सहयोग और स्थानीय निवासियों की सक्रिय भागीदारी से यह पर्व जखनिया समेत पूरे इलाके में भाईचारे और अमन-चैन का संदेश देकर संपन्न हुआ।







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