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कुछ न कुछ बहुत ही बड़ा गेम जरूर चल रहा है कोरोना के पीछे !




जुलाई सोमवार 27-7-2020


किरण नाई ,वरिष्ठ पत्रकार -अल्पायु एक्सप्रेस


इन सवालों को खड़ा करने से जिन्हें बुरा लगता है उन्हें लगा करे बुरा ?


कुछ न कुछ बहुत ही बड़ा गेम जरूर चल रहा है कोरोना के पीछे !.... आज हम इसे समझ नही पा रहे हैं लेकिन एक दिन यह सच बाहर जरूर आएगा अब आप ही देखिए एक ही कम्पनी है जिसने कोरोना जाँच की देश की सबसे पहली आरटी पीसीआर टेस्टकिट बनाई, उसने आश्चर्य जनक रूप से 26 मार्च को कोरोना वायरस की पहली टेस्टिंग किट बाजार में उतार दी थी

अब यही कम्पनी देश की पहली रैपिड एंटीजन टेस्ट किट बना देती है और उसे ICMR तुरन्त परमिशन दे देता है हम बात कर रहे हैं 'मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस' की ....जिसकी रैपिड एंटीजन किट को कोराना वायरस के इलाज के लिए सरकारी मंजूरी दे दी गयी है


यह कम्पनी यू तो 2016 में फार्म की गई थी लेकिन पार्टिक्युलर इस कम्पनी की इसकी एक्टिविटी मार्च 2020 में ही शुरू हुई है...........मायलैब पुणे की कम्पनी है उसकी किट मार्केट में उतरते ही एक हफ्ते के अंदर उसके अंदर पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट के मालिक अदार पूनावाला द्वारा निवेश किया गया और साथ ही महाराष्ट्र के सकाल ग्रुप के मालिक अभिजीत पवार द्वारा भी बड़ा निवेश किया गया....अब अदार पूनावाला किस प्रकार माइक्रोसॉफ्ट के मालिक से जुड़े हैं यह बार बार बताने की जरूरत नही है

मध्य जून में आईसीएमआर ने एक दक्षिण कोरियाई कंपनी एसडी बायोसेंसर द्वारा तैयार किए गए एंटीजन टेस्ट किट को मंजूरी दी थी जिससे लगभग डेढ़ महीने से धड़ाधड़ टेस्टिंग हुई है

कल यह भी खबर आई है कि भारत के दवा नियामक ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने तीन कंपनियों का रैपिड जांच किट आयात करने का लाइसेंस रद्द दिया है जबकि 16 कंपनियों का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इन कंपनियों को यूएस एफडीए ने अपनी कोरोना वायरस सीरोलॉजी टेस्ट किट सूची से हटा दिया है। ये फर्में वे किट आयात कर रही थीं जिनके वितरण पर अमेरिका ने रोक लगा दी है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) ने अपनी सूची से ये टेस्ट किट बनाने वाली निर्माता फर्मों को बाहर कर दिया है। इसमे एसडी बायोसेन्सर भी शामिल हैं


यानी यहाँ ये निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भारत इस मामले में अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के हर आदेश का पालन कर रहे हैं

अब सबसे मजे की बात यह है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट प्रणाली भारत मे फेल सिद्ध हुई है पिछले एक महीने के रिजल्ट बता रहे हैं है कि एंटीजन टेस्ट के रिजल्ट सिर्फ 30 से 40 प्रतिशत ही सही पाए जा रहे है.....

जुलाई के बाद से मुम्बई के BMC ने लगभग 8872 एंटीजन टेस्ट किए हैं जिसमें 1152 पॉजिटिव निकले. जो सिम्पटोमेटिक मरीज निगेटिव थे, उनका फिर फिर से टेस्ट किया गया और बाद में उनमें से 60-65% पॉजिटिव निकले.


एंटीजन टेस्ट से पहले तक दिल्ली का पॉजिटिव रेट औसत 25% तक रहता था। पॉजिटिव रेट यानी हर दिन जितने टेस्ट हो रहे, उसमें से कितने लोग पॉजिटिव मिल रहे। लेकिन, एंटीजन टेस्ट के बाद पॉजिटिव रेट भी गिरता गया। जिसे केजरीवाल सरकार अपनी सफलता बता कर प्रचारित करती रही है .......दरअसल यह सफलता एंटीजन टेस्ट किट की दोषपूर्ण जांच का नतीजा है


एंटीजन टेस्ट किट की जब आईसीएमआर और दिल्ली एम्स की लैब में जांच की गई। इसमें पता चला कि अगर कोई व्यक्ति निगेटिव है, तो एंटीजन टेस्ट में उसका रिजल्ट 99.3% से 100% तक आ जाएगा। लेकिन, किसी व्यक्ति में कोरोनावायरस है या नहीं, इसका रिजल्ट 50% से 84.6% तक सही होगा।

अब यदि ICMR यह जान रहा है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट के नतीजे इतने गड़बड़ है तो वह कैसे मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस' की किट को मंजूरी दे रहा है ?


एक बात और है इन सवालों को खड़ा करने से जिन्हें बुरा लगता है उन्हें लगा करे बुरा ? अगर कोई गड़बड़ी दिख रही है तो हम उसके विरुद्ध आवाज तो उठाएंगे ही ....आप हर बात के लिए 'विज्ञान में तो ऐसा ही होता है' का पल्लू नही पकड़ सकते

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