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पूर्वांचल में ओवैसी की एन्ट्री से सपा में हलचल निशाने पर रही सपा, भाजपा नहीं

मंगलवार, जनवरी 12-1-2021


👉जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर-( किरण नाई ,वरिष्ठ पत्रकार -अल्पायु एक्सप्रेस-Alpayu Express)



उत्तर प्रदेश की सियासत में एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री के बाद अब समीकरण बदलने लगे हैं। पूर्वांचल के दौरे पर ओवैसी के निशाने पर भाजपा नहीं बल्कि सपा रही है। पूर्वांचल में ओवैसी की दस्तक के बाद अब राजनैतिक गलियारों में उसके मायने निकाले जा रहे हैं। ओवैसी के दौरे से समाजवादी पार्टी का खेमा सहमा हुआ है। आलम ये था कि जौनपुर आये सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी ओवैसी के आरोपों का जवाब देने से बचते नजर आए।

पूर्वांचल दौरे पर पहुंचते ही असदुद्दीन ओवैसी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधकर कुछ अलग सियासी संकेत दे दिए हैं। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अखिलेश राज में उन्हें उत्तर प्रदेश में आने पर पाबंदी थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि ओवैसी को उनके आरोपों का करारा जवाब मिलेगा। ओवैसी के रवानगी के घंटे भर बाद जब अखिलेश यादव बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचे। ओवैसी के आरोपो के बाबत मीडिया ने सवाल दागा तो सपा सुप्रीमो कन्नी काटते नजर आए। अलबत्ता उन्होंने आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के रिश्ते को जरुर सामने रखा। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ की जनता समाजवादी लोगों से बेइंतहा प्यार करती है। लगभग चार मिनट के इंटरव्यू में उन्होंने एक बार भी ओवैसी का नाम नहीं लिया।


माना जा रहा है कि ओवैसी की एंट्री का सबसे बड़ा नुकसान समाजवादी पार्टी को उठाना पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अभी तक मुस्लिम वोटबैंक का झुकाव सपा की ओर था। यादव और मुस्लिम वोटबैंक के सहारे समाजवादी पार्टी ने सत्ता के शिखर पर पहुंच चुकी है। लेकिन राजनैतिक जानकार ये मान रहे हैं कि अगर उत्तर प्रदेश में ओवैसी मजबूती से चुनाव लड़ते हैं तो इसका सीधा खामियाजा समाजवादी पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। दरअसल हाल के दिनों में ओवैसी मुस्लिमों के मुखर नेता के तौर पर उभरे हैं। बात चाहे कश्मीर में धारा 370 हटाने की हो या फिर एनआरसी के मुद्दे की। हर बार ओवैसी संसद से लेकर सड़क तक मोदी सरकार की मुखालफत करते नजर आएं। ओवैसी के आक्रामक तेवर मुस्लिम वर्ग के युवाओं को खूब भा रहे हैं।

यहाँ यह भी बता दे कि वाराणसी से आजमगढ़ जाते समय जनपद जौनपुर में ओवैसी के स्वागत करने वालों की संख्या जो संकेत देती नजर आयी उससे इतना तो साफ दिखा कि अल्पसंख्यक समुदाय की रूझान ओवैसी की ओर मजबूतीसे है। क्योंकि जगह जगह ढोल तासा नगाड़े बजा कर स्वागत करना नये राजनैतिक समीकरण की ओर इशारा कर रहा था।

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