Search
  • alpayuexpress

विश्व हिंदू परिषद के इस नेता की हत्या कर मुख्तार ने ब्लैक डायमंड के कारोबार पर किया था कब्जा




अगस्त गुरुवार 13-8-2020


किरण नाई ,वरिष्ठ पत्रकार -अल्पायु एक्सप्रेस


दो दशक बाद भी चल रहा है सिक्का, पुलिस कार्रवाई करने की तैयारी में जुटी


कई एजेंसियां मुख्तार के कोयला कारोबार से जुड़े लोगों की खंगाल रही है कुंडली


वाराणसी। काशीलाइव

ब्लैक डॉयमंड के नाम से मशहूर एशिया की सबसे बड़ी कोयला मंडी चंदासी पूर्वी उत्तर प्रदेश के माफियाओं को अपनी ओर बखूबी आकर्षित किया है। कोयले की संभवतः इस अवैध मंडी से बड़ी मात्रा में धन उगाही के लिए समय-समय पर जरायम जगत में अपने नाम का रसूख रखने वालों ने अपना सिक्का चलाया है। यह क्रम आज भी बदस्तुर जारी है।


जितना बड़ा नाम है उतनी ही बड़ी रकम इस ब्लैक डॉयमड के मार्केट से सफेदपोश माफियाओं के पास पहुंचती है। वह अपने गुर्गों को उसी अनुपात में धन देकर लगातार इस मंडी पर हावी रहने की कोशिश भी करते रहते हैं। इन सबमें सबसे बड़ा नाम मुख्तार अंसारी का है। मुख्तार एक ऐसा शख्स था जिसने अपने ही गुरू की हत्या करवाई थी। जिसने उसे इस ब्लैक डायमंड के काले कमाई से रूबरू कराया था। आइये जानते हैं कि कैसे मुख्तार गिरोह ने ब्लैक डॉयमंड कहे जाने वाले कोयले के इस कारोबार पर अपना वर्चस्व कायम किया।


बीते तीन दशक के दौरान इस मंडी से धन उगाही के लिए माफियाओं के गुर्गों में कई बार गोलियां भी चली और बहुत लोगों की जान भी गई। लेकिन जो बीस पड़़ा उसका सिक्का आज भी चलना बदस्तुर जारी है। माफियाओं के इस ब्लैंक डॉयमंड पर कब्जे के मामले में सफेदपोश और खाकी के लोगों ने भी बखूबी सपोर्ट किया जिसका नतीजा यह है कि जब जिसकी सरकार बनी तब उसके नुमाइंदगों ने माफियाओं को संरक्षण देने के नाम पर चंदासी की इस कोयला मंडी से अवैध रूप से धन उगाही की और आज तक करते चले आ रहे हैं। ब्लैक डॉयमंड के काले कारोबार की इस मंडी से होने वाली अकूत कमाई का हिस्सा यूं तो पूर्वांचल के सभी माफियाओं के जेब तब पहुंचता है लेकिन उन सब में सबसे बड़ा नाम है मुख्तार अंसारी का।


यले के इस काले कारोबार में उसकी इंट्री कैसे हुई उसको समझने के लिए हमें लगभग ढ़ाई दशक पीछे लौटना होगा। माना जाता है कि कोयले के काले करोबार से होने वाली अकूत कमाई का ककहरा मुख्तार अंसारी को इस धंधे के बड़े कारोबारी व विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे नंद किशोर रूंगटा ने पढ़ाया था। रूंगटा ने ही मुख्तार अंसारी को उन सभी तरीकों को बताया जो इस काली कामाई की स्त्रोत थे। सारी जानकारी हासिल हो जाने के बाद विश्व हिंदू परिषद के इस बड़े नेता और कोयला के बड़े कारोबारी का अपहरण हो गया। नंद किशोर रूंगटा का अपहरण उनके वाराणसी के रवींद्रपुरी कालोनी स्थित आवास से ही 22 जनवरी 1997 की शाम किया गया। इस घटना ने समूचे उद्योग जगत में सनसनी फैला दी। रूंगटा के अपरहण में मुख्तार अंसारी के गिरोह के कुछ सदस्यों का नाम सामने आया था।


इस मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द की गई थी। मामले की तफ्तीश में पता चला कि रूंगटा के परिवार से दो करोड़ रूपये की फिरौती लेने के बाद उनकी हत्या करके शव को इलाहाबाद के झंसू स्थित गंगा नदी में फेंक दिया गया था। रूंगटा के शव का पता आज तक नहीं चल पाया। सीबीआई जांच में मुख्तार गैंग के दो सदस्यों अताउर्र रहमान उर्फ बाबू व शहाबुद्दीन का नाम सामने आया था। यह दोनों गाजीपुर जिले के महरूपुर गांव के रहने वाले थे। सीबीआई ने दोनों पर दो-दो लाख का ईनाम भी घोषित किया गया था। यह दोनों आज तक पकड़ में नहीं आए है।


बीआई ने अपनी जांच में कहा है कि शहाबुद्दीन ने पाकिस्तान में शादी कर ली और वही बस गया। वही अताउर्ररहमान नेपाल व बांग्लादेश में छिपकर रह रहा है। इसके बाद सीबीआई ने इस जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जबकी खुफिया सूत्रों का का कहना था कि दोनों अभी भी गाजीपुर में रहने वाले अपने परचीतों के संपर्क में हैं। इस मामले में सीबीआई की ओर से दोनों की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल से रेड कार्नर नोटीस भी जारी नहीं कराई थी।

1 view0 comments