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नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म में न्यायालय ने पिता को दस साल कैद की सजा सुनाई है

नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म में न्यायालय ने पिता को दस साल कैद की सजा सुनाई है


नवम्बर शुक्रवार 6-11-2020


किरण नाई ,वरिष्ठ पत्रकार -अल्पायु एक्सप्रेस



यह घटना डिडौली कोतवाली थानाक्षेत्र के एक गांव की है। यहां रहने वाली महिला 4 अप्रैल 2018 को पड़ोसी गांव से अपनी शादीशुदा बड़ी बेटी को बुुलाने के लिए गई थी, जबकि उसकी तेरह वर्षीय नाबालिग बेेटी घर पर थी। रात में पिता आया। उसने नाबालिग बेटी को बुरी नीयत से पकड़ लिया। उसके साथ दुष्कर्म किया। नाबालिग की चीख पुकार सुनकर लोगों की भीड़ जमा हो गई। आरोपी पिता वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया। ग्रामीणों की सूचना पर मां घर पहुंची। उसने पति के खिलाफ बेटी के साथ दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कराई। बाद में पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया थी। तभी से वह जेल में बंद है, तमाम कोशिशों के बावजूद भी उसको जमानत नहीं मिल सकी थी। यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह की अदालत में विचाराधीन था। नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म में न्यायालय ने पिता को दस साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर तीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की धनराशि से 20 हजार रुपये पीड़िता को देने होंगे। मां की गैरमौजूदगी में पिता ने घटना को अंजाम दिया था। तभी से आरोपी जेल में बंद था। गुरुवार को न्यायालय ने मुकदमे की सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता रविंद्र गर्ग ने जोरदार पैरवी की। तर्क दिया कि आरोपी पीड़िता का सगा पिता है। उसने अपनी नैतिक पराकाष्ठा के विपरीत जाकर अपनी और समाज की मर्यादा का ध्यान नहीं रखा। अपनी सगी बेटी के साथ हैवानियत को अंजाम दिया है। सामाजिक दृष्टि से बहुत ही घृणित और जघन्य अपराध किया है। ऐसे व्यक्ति को समाज में रहने का अधिकार नहीं हैं। इसलिए आरोपी को सख्त-सख्त से सजा दी जाए। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी पिता को दुष्कर्म का दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोषी को 10 साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

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