top of page
Search
  • alpayuexpress

CAA से किसी भी भारतीय मुसलमान को कोई समस्या नहीं है लेकिन इस सवाल का जवाब कौन देगा?




अगस्त सोमवार 17-8-2020


किरण नाई ,वरिष्ठ पत्रकार -अल्पायु एक्सप्रेस


हजारों लोग (जिनमें मुसलमान भी शामिल हैं) हर रोज़ भाजपा समेत विभिन्न राजनीतिक पार्टियों में शामिल होते हैं, सैंकड़ों इस्तीफा देते हैं। हजारों लोग हर दिन इस पार्टी से उस पार्टी में जाते हैं। क्या इस पर आप लिखते हैं? गरियाते हैं? आरोप प्रत्यारोप की बौछार करते हैं? लोकतंत्र है हर कोई किसी भी पार्टी में जाए वह उसका फैसला है। इसमें परेशान नहीं होनी चाहिए।


सवाल भारतीय हिंदी मीडिया के उस प्रोपेगेंडे पर किया जाना चाहिए जो किसी भी ऐरे ग़ैरे को शाहीन बाग़ का 'एक्टिविस्ट' और सीएए विरोधी आंदोलनकारी बता रहा है। मीडिया ने यह रुख यूं ही नहीं लिया है, बल्कि इसके पीछे एक मानसिकता है। वह मानसिकता जो यह बताने की कोशिश कर रही है, देखिए सीएए आंदोलनकारी कांग्रेस और समाजिक संगठनों द्वारा फैलाए गए भ्रम जाल में फंस गए थे।

बिल्कुल वैसे ही जैसे सत्ताधारी दल के नेता एंकर कहा करते हैं कि सीएए तो नागरिकता देने क़ानून है लेने का नहीं, इसलिए अब इन्हें समझ आ रहा है और इनका भ्रम टूट रहा है कि नया संशोधित नागरिकता क़ानून से किसी भी भारतीय मुसलमान को कोई समस्या नहीं है। लेकिन इस सवाल का जवाब कौन देगा?


असम के डिटेंशन सेंटर में रहने वाले साढे चार लाख ग़रीब, अनपढ़ मुसलमानों का क्या होगा जो अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए थे? क्या सीएए उनके खिलाफ नहीं है? अब उनके पास तो एक ही रास्ता बचता है कि वे धर्म परिवर्तन करें, क्योंकि वे जिस धर्म को मानने वाले हैं, उसके मानने वालो को CAA द्वारा नागरिकता नहीं दी जाएगी।

1 view0 comments
bottom of page