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राजस्व विभाग लागू करने जा रहा यह नियम!....रियल टाइम खतौनी:-चढ़ावे से तो बचेंगे मगर चूके तो लंबे फंसे

राजस्व विभाग लागू करने जा रहा यह नियम!....रियल टाइम खतौनी:-चढ़ावे से तो बचेंगे मगर चूके तो लंबे फंसेंगे


किरण नाई वरिष्ठ पत्रकार


गाजीपुर:- उत्तर प्रदेश में चंद महीनों के भीतर ऐसी व्यवस्था लागू हो जाएगी कि भूमि का बैनामा कराने के बाद खतौनी पर नाम चढ़वाने के लिए तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। न ही चढ़ावा चढ़ाना पड़ेगा। यह संभव होगा रियल टाइम खतौनी से। इसके तहत बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाएगा।

इसके लिए तहसीलों से लेकर राजस्व परिषद तक में तैयारियां तेजी से चल रही हैं। ट्रायल के तौर पर जिले में 60 बैनामों में रियल टाइम खतौनी सिस्टम लागू भी किया गया मगर इसमें कुछ तकनीकी गड़बड़ी सामने आ गई। इसकी रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेजी गई है ताकि साॅफ्टवेयर में जरूरी सुधार किए जा सके।

उधर शासन ने नई व्यवस्था लागू होने के पहले 31 जुलाई तक खतौनी से जुड़ी सभी खामियां दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं क्योंकि इसके व्यवहार में आ जाने के बाद खतौनी में नाम सुधार जैसे कई खामियों को दुरुस्त नहीं कराया जा सकेगा। हालांकि खतौनी से जुड़ी खामियों को दुरुस्त करने की रफ्तार अभी बहुत धीमी है। इस रफ्तार से जुलाई तक लक्ष्य पूरा कर पाना आसान नहीं साबित हो रहा। सूत्रों के मुताबिक जिले में अभी 20 से 25 फीसदी ही काम हुआ है। रियल टाइम खतौनी 19 काॅलम की होगी। अभी खतौनी सिर्फ 13 काॅलम की है।

ऐसे काम करेगी रियल टाइम खतौनी व्यवस्था

संपत्ति का बैनामा कराने के बाद नामांतरण के लिए विलेख की एक प्रति तहसील चली जाती है। वहां 45 दिनों में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यानी विक्रेता का नाम काटकर क्रेता का नाम चढ़ता है। इसके बाद अमल दरामद के लिए फाइल जाती है और खतौनी में नाम चढ़ने पर भी दो से तीन महीने का समय लग जाता है। नाम जल्द चढ़वाने के लिए आवेदकों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है।

रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू होने के बाद बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही क्रेता का नाम खतौनी पर चढ़ जाएगा। बीच की सभी तरह की उलझाऊ प्रक्रिया से निजात मिल जाएगी। तहसील सूत्रों के मुताबिक ऐसे 1700 से अधिक मामले में लंबित हैं, जिनकी खतौनी नहीं जारी हो सकी है। हालांकि, तहसील प्रशासन की दलील है कि कानूनी पेंच की वजह से फाइलें निस्तारित होने में देरी होती हैं।

केस- 1 चढ़ावे के बाद भी महीनों गुजरे मगर खतौनी नहीं

महराजगंज निवासी संजय गुप्ता बुधवार को तहसील में पहुंचे थे। उन्होंने छह माह पूर्व एक भूमि का बैनामा कराया था। रजिस्ट्री कार्यालय में प्रक्रिया के तहत उन्होंने खारिज दाखिल के लिए सारे कागजात जमा कराए। लेकिन, अभी तक उनको नई खतौनी नहीं मिल सकी । भूमि के मालिक के रूप में उनका नाम नहीं चढ़ पाया। संजय ने बताया कि इस चक्कर में उनके 3400 रुपये खर्च हो गए हैं।

केस- 2  खतौनी में हुआ विलंब, लग गई आपत्ति

गुलरिहा क्षेत्र के रहने वाले विन्ध्याचल ने वर्ष 2022 के दिसंबर माह में बालापार में एक भूमि खरीदी। बैनामा के बाद तय समय में उनकी भूमि खतौनी नहीं मिल सकी। इस दौरान वे जरूरी काम से मुंबई चले गए। लौटकर आए तो उनको खतौनी की जरूरत पड़ी। तहसील में गए तो पता लगा कि अभी खतौनी नहीं मिल पाएगी। उनके मामले में आपत्ति होने से प्रक्रिया अटक गई है। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से फाइल निस्तारण का आवेदन किया है।

जांच करते लेखपाल, तब पूरी होती हैं प्रक्रिया

भूमि के विक्रेता का नाम हटाकर उसकी जगह क्रेता का नाम चढ़ाने के लिए तहसील में फाइल जाती है। तब इसकी जांच लेखपाल करते हैं। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया होती है। तमाम लोग शिकायत कर चुके हैं कि इस दौरान जिसने चढ़ावा दे दिया, उसके खारिज दाखिल में कोई दिक्कत नहीं आती। आसानी से उसका नाम खतौनी में चढ़ जाता है। यदि किसी ने भेंट देने में कोई चूक की तो उसे तहसील का चक्कर लगाना ही पड़ता है।

कभी लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लग पाती है, तो कभी अधिकारी नहीं मिलते हैैं। अधिकांश मामलों में लेखपाल की रिपोर्ट लगाने में विलंब होता है। इस चक्कर में 45 दिन के बजाय तीन से चार महीन लगते हैं। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी इससे इंकार करते हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जिस मामले में कोई आपत्ति होती है या गड़बड़ी पाई जाती है। उसमें ही दिक्कत आती है।नई व्यवस्था से राहत मगर फर्जीवाड़े का तोड़ जरूरीशासन की ओर से रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू किए जाने के बाद लोगों को तहसीलों की दौड़ लगाने और चढ़ावा देने से तो राहत मिल जाएगी नई व्यवस्था में खाताधारकों का अंश तय करने में भी दिक्कत नहीं होगी। इससे कोई भी व्यक्ति अपने अंश से अधिक दूसरे का अंश नहीं बेच पाएगा, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक जमीन का फर्जीवाड़ा भी बढ़ेगा।

बैनामा के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाने से जबतक जमीन के फर्जीवाड़े की जानकारी होगी, तबतक जमीन दूसरे के नाम यानी जमीन खरीदने वाले के नाम दर्ज हो जाएगी। इसके बाद वह किसी और को और वह किसी और को दो से तीन दिन के भीतर जमीन बैनामा कर सकेगा। मौजूदा व्यवस्था में नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान क्रेता, विक्रेता दोनों को सूचना भेजी जाती है।

फर्जीवाड़े के मामले में आपत्ति दाखिल होती है और कई लोगों को राहत भी मिलती है। कई अधिवक्ता भी इस नुकसान की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि बैनामा के बाद इश्तिहार की प्रक्रिया होती है। क्रेता और विक्रेता के पास इसे भेजकर जानकारी दी जाती है। लेकिन रियल टाइम खतौनी होने से इश्तिहार नहीं दिया जा सकेगा। इन दिक्कतों का तोड़ निकालना जरूरी है।

रियलटाइम खतौनी के ये हैं फायदे

- भूमि का बैनामा होने के 24 घंटे के बाद ही नई खतौनी जारी हो जाएगी। विक्रेता की जगह क्रेता का नाम चढ़ जाएगा।- इस खतौनी से गाटा संख्या में खातेदारों के नाम के आगे अंश (उनके हिस्से की कितनी भूमि है) उसका जिक्र होगा।- अंश का जिक्र होने से कोई व्यक्ति अपने हिस्से से अधिक भूमि नहीं बेच सकेगा। कोई किसी की भूमि पर अधिक कब्जा नहीं कर सकेगा।- खतौनी के लिए तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। काम कराने के नाम पर दलाल वसूली नहीं कर पाएंगे।- जमीन के कारोबारी या खरीदार, किसी लालच में पड़कर आपत्ति नहीं लगा सकेंगे।

सदर तहसीलदार विकास सिंह ने कहा कि सदर तहसील में 60 रियल टाइम खतौनी पूर्व में ट्रायल के तौर पर की गई थीं लेकिन, इसमें गड़बड़ी होने की वजह से राजस्व परिषद को सुधार के लिए भेजा गया है। रियल टाइम खतौनी में मृतक और वरासत के संशोधन की व्यवस्था नहीं है। अन्य भी कई दिक्कत आ रही है। साफ्टवेयर दुरुस्त होते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।

कदम जनहित के हैं

नई व्यवस्था से बैनामा के बाद ही क्रेता की खतौनी उनको मिल जाएगी। अभी ताे नामांतरण की प्रक्रिया में तीन से चार माह लग रहा है। लोग रोजाना भटकते रहते हैं। इसे जल्द से जल्द लागू करना चाहिए। जनहित में है। -कृष्ण दामोदर पाठक, अधिवक्ता।

बैनामा गलत हुआ तो परेशानी

इससे खतौनी तो 24 घंटे में मिल जाएगी लेकिन, गलत बैनामा होने, कम जमीन का पैसा देकर अधिक भूमि लिखवा लेने सहित अन्य मामलों में दिक्कत आएगी। जब तक कोई शिकायत होगी, तब तक फर्जीवाड़ा करने वाले एक ही भूमि को कई लोगों को बेच चुके होंगे। -राजेश कुमार शर्मा, अधिवक्ता।

फर्जी चेक के भुगतान की बड़ी दिक्कत

अधिवक्ता देवेंद्र कुमार ने कहा कि खतौनी लेने के लिए काफी समय लग रहा है। नई व्यवस्था ठीक तो है, लेकिन फर्जी चेक या गड़बड़ी की स्थिति में भुगतान नहीं होने पर खारिज दाखिल नहीं रुक सकेगा। क्रेता और विक्रेता के लेनदेन में गड़बड़ी होने पर लोग कोई रोक नहीं लगा सकेंगे।

अधिवक्ता रवि प्रकाश ने कहा कि कई बार कम पैसा देकर लोग अधिक जमीन लिखवा लेते हैैं। गरीब और अनपढ़ लोगों के साथ अक्सर ऐसी शिकायत आती है। किसी ने 60 डिस्मिल भूमि बेची और खरीदार ने 160 डिस्मिल लिखवा ली तो दिक्कत आएगी। खतौनी पर नाम चढ़ने के बाद क्रेता तत्काल मालिक हो जाएगा। अभी अधिक समय मिलने की वजह से लोग आपत्ति लगा देते हैं। नई व्यवस्था में ऐसा नहीं हो सकेगा। ऐसे में रजिस्ट्री के पहले क्रास चेकिंग और ज्यादा बरतनी पड़ेंगी।

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