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यदि गोरी लंकेश की सुरक्षा की बात BJP और RSS द्वारा उठाई गई होती तो आज शुभम हमारे बीच होता




यदि गोरी लंकेश की सुरक्षा की बात BJP और RSS द्वारा उठाई गई होती तो आज शुभम हमारे बीच होता


जुन शुक्रवार 26-6-2020


( किरण नाई ,वरिष्ठ पत्रकार -अल्पायु एक्सप्रेस-Alpayu Express)


उन्नाव के रहने वाले पत्रकार शुभम मणि त्रिपाठी भाजपा के समर्थक रहे हैं. भूमाफियाओं के खिलाफ एक रिपोर्ट लिखने के कारण उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई. सेम उसी पैटर्न में जिस प्रकार पत्रकार गोरी लंकेश की हत्या कर दी गई थी. तब भाजपा और आरएसएस समर्थक गोरी लंकेश की हत्या को ये कहकर जायज ठहरा रहे थे कि वह हिन्दू विरोधी कंटेंट लिखतीं थीं. लेकिन लिखती क्या थीं ये न किसी को पता था, न किसी ने कभी पढ़ा था.

भाजपा और आरएसएस ने देश के भोले भाले नागरिकों की समझ में ये तो डाल दिया कि हिन्दू धर्म के खिलाफ लिखना बुरा है, लेकिन ये कभी नहीं डाला कि पत्रकारों का मारा जाना उससे भी बुरा है. लिखने-बोलने के लिए किसी आदमी की हत्या किया जाना उससे भी बुरा है.

लिखने-पढ़ने-बोलने के बदले हत्या की जा सकती है ये तर्क कौन सी पार्टी-संगठन आपके दिमाग में भर रही है? ये विचार करने की जरूरत है. समाज में जो नफरत फैलाई जा रही है, परिणाम सामने आने लगे हैं. आज भाजपा समर्थक भी उस नफरत से सुरक्षित नहीं हैं। आज हमने शुभम जैसा प्यारा नौजवान खो दिया. यदि गोरी लंकेश की सुरक्षा की बात भाजपा और आरएसएस द्वारा उठाई गई होती तो आज शुभम हमारे बीच होता.

शुभम की हत्या करने से पहले ही हत्यारों के पैर कांपते कि परिणाम बुरा हो सकता है. हमें सोचना चाहिए पत्रकारों की हत्या कर देने को, उनपर झूठी FIR दर्ज कर देने को, उन्हें पीट देने को सरल किसने बनाया? कौन पार्टी इसके पीछे काम कर रही है? इस बात के लिए आपको कौन तैयार कर रहा है कि किसी को उसके लिखे के लिए गोली मार दिया जाना जायज है!

वे कौन लोग हैं जो गोली मारों सालों को जैसे नारे दे रहे हैं? यदि आपको इस नारे के साथ किसी खास पार्टी, नेताओं, संगठनों और झंडों के नाम याद आ रहे हैं तो समझिए नौजवान पत्रकार शुभम के हत्यारे वे ही हैं कोई और नहीं. इसलिए ये जरूरी है कि हर मौत के खिलाफ मिलकर आवाज उठाई जाए, ये जरूरी है कि संविधान के लिए मिलकर लड़ा जाए. ये न सोचा जाए कि ये फलानी विचारधारा का है.

पत्रकार शुभम की विचारधारा, पार्टी, धर्म, संगठन चाहे जो कुछ रहे हों, हम उनके बोलने के अधिकार के लिए खड़े हैं, उनके परिवार को न्याय मिलना चाहिए.

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