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मृदा प्रदूषण रासायनिक खादों के अंधाधुन्द प्रयोग का परिणाम:निशांत सिंह

मृदा प्रदूषण रासायनिक खादों के अंधाधुन्द प्रयोग का परिणाम:निशांत सिंह

अमित उपाध्याय पत्रकार


गाजीपुर। पी०जी० कालेज गाजीपुर में पूर्व शोध प्रबन्ध प्रस्तुत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्याल के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हाल में सम्पन्न हुई, जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र- छात्राएं उपस्थित रही। उक्त संगोष्ठी में कृषि संकाय के कृषि रसायन एवं मृदा विज्ञान विषय के शोधार्थी निशांत सिंह ने अपने शोध प्रबंध शीर्षक "क्रोमियम प्रभावित मृदा में चरणबध्द तरीके से धान और सरसों की फसल में कार्बनिक खाद का प्रभाव" नामक विषय पर शोध प्रबन्ध व उसकी विषय वस्तु प्रस्तुत करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुन्द प्रयोग से कृषि भूमि प्रदूषित हो गयी है, भारी धातुओं से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण मानव जीवन के लिए एक घातक माना गया है। क्रोमियम एक सर्वव्यापी भारी धातु है जिसमें तीन मुख्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ होती हैं, जैसे क्रोमियम डबल प्लस, क्रोमियम ट्रीपल प्लस एवं क्रोमियम छः प्लस एक। यह क्रोमियम चमड़े के कल कारखानों, लौह अयस्क खदानों, कपड़ा रंगाई उद्योगों आदि से निकलता है और पर्यावरण में फैल जाता है। हेक्सावलेंट क्रोमियम सबसे जहरीला माना जाता है क्योंकि यह जीवों की बायोमेम्ब्रेन को आसानी से पार कर सकता है और घातक बीमारियों को जन्म देता है। धान और सरसों पर किये गए शोध से यह निष्कर्ष सामने आया है कि क्रोमियम द्वारा हुए प्रदूषण के कारण धान और सरसों के पौधो की वृद्धि में कमी आती है तथा प्रति पौधा उपज घाट जाती है। शोध के दौरान यह देखा गया कि जब धान के भूसे से बनी पोल्ट्री खाद को प्रयोग किया गया तो क्रोमियम से होने वाले नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते है, जिसके परिणामस्वरूप पौधो में पत्तियों की संख्या, प्रति पौधा शाखाओं की संख्या, पुष्पगुच्छ की लंबाई, पुष्प गुच्छ की संख्या, प्रति सिलिका में बीजों की संख्या, शुष्क पदार्थ का संचय और प्रति पौधा बीज उपज में वृद्धि पायी गई है। प्रस्तुतिकरण के बाद विभागीय शोध समिति,अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ व प्राध्यापको तथा शोध छात्र-छात्राओं द्वारा शोध पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए जिनका शोधार्थी निशांत सिंह ने संतुष्टिपूर्ण एवं उचित उत्तर दिया। तत्पश्चात समिति एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे०(डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध प्रबंध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान किया। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे० (डॉ०) जी० सिंह , मुख्य नियंता प्रोफेसर (डॉ०)एस० डी० सिंह परिहार, शोध निर्देशक एवं कृषि रसायन एवं मृदा विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफे०(डॉ०) अवधेश कुमार सिंह, प्रोफे०(डॉ०) अरुण कुमार यादव, डॉ० रामदुलारे, डॉ० कृष्ण कुमार पटेल, डॉ० अमरजीत सिंह, डॉ० सुधीर कुमार सिंह, डॉ० प्रोफे०(डॉ०)सत्येंद्र नाथ सिंह, डॉ० हरेंद्र सिंह, डॉ० रविशेखर सिंह, डॉ० योगेश कुमार, डॉ०शिवशंकर यादव एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण तथा शोध छात्र छात्रएं आदि उपस्थित रहे। अंत में अनुसंधान एवं विकास प्रोकोष्ठ के संयोजक प्रोफे०(डॉ०) जी० सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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