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तिरंगे के ताकत की बदौलत हुई वतन वापसी!... परिवार की चिंता और वतन वापस लौटने की आस और जिंदगी की दुआ,स

तिरंगे के ताकत की बदौलत हुई वतन वापसी!... परिवार की चिंता और वतन वापस लौटने की आस और जिंदगी की दुआ,सूडान में खानपुर के राधेश्याम के वो 8 दिन


मोहम्मद इसरार पत्रकार (उप संपादक)


खानपुर। खबर गाजीपुर जिले से है जहां पर तिरंगे के ताकत की बदौलत खानपुर के राधेश्याम हुई वतन वापसी आपको बता दें कि गृहयुद्ध से ग्रस्त देश सूडान से सुरक्षित वापस लौटे खानपुर क्षेत्र के लौलहां निवासी राधेश्याम यादव घर वालों से मिलकर भावुक हो गए। बम, गोली, बारूद, लूटपाट, आगजनी के बीच आठ दिन रहने के बाद अपने घर पहुंचे राधेश्याम ने बताया कि सितंबर महीने में वो ओमेगा कंपनी की ओर से सूडान के स्टील फैक्ट्री में काम करने गए थे। खारतून शहर के मालाजी मार्किट के फैक्ट्री में काम करते हुए अचानक सूडान के गृहयुद्ध में फंस गए। विद्रोहियों ने कंपनी में लूटपाट मचाकर सारा सामान ले लिया। इसके बाद वो करीब 150 भारतीयों के साथ एक हॉल में फंस गए। आठ दिनों तक बचे खुचे राशन से एक समय भोजन कर सभी लोग जिंदगी की दुआ करते हुए दिन बिताते थे। बताया कि हम लोगों को यूक्रेन युद्ध में भारतीयों को सुरक्षित निकल आने के चलते अपने तिरंगे पर पूरा भरोसा था। घर वालों से दिन में एक बार सिर्फ वाइस कॉलिंग या मैसेज से बात हो पाती थी। सभी पैसे, मोबाइल आदि लूट लिए जाने के बाद 8 दिन भयावह हालत में गुजरे। इस बीच अचानक भारतीय दूतावास से खबर आयी और वो वो एक साथ 200 लोग पानी के जहाज से सऊदी अरब के लिए निकल गए। बताया कि दुबई में भी सभी भारतीयों की अच्छी सेवा हुई और हवाई जहाज से वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचे। बता दें कि तीन भाइयों में सबसे छोटे राधेश्याम की मां इंद्रासनी देवी और पिता बरसाती बेटे से मिलकर बिलख पड़े। पत्नी बृजबाला और 7 वर्षीय बेटी प्रिया पिता को पाकर चहक उठी।

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