‼️डीएम-सीडीओ की पहल!..बेसिक स्कूलों की यूनिफॉर्म सिलाई से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मिलेगा रोजगार‼️
- alpayuexpress
- Jul 2
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‼️डीएम-सीडीओ की पहल!..बेसिक स्कूलों की यूनिफॉर्म सिलाई से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मिलेगा रोजगार‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
जुलाई गुरुवार 2-7-2026
ग़ाज़ीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है। जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी सिलाई में दक्ष महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने बेसिक शिक्षा विभाग के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की यूनिफॉर्म सिलाई का कार्य स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों की उन महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए, जो सिलाई का कार्य करने में पारंगत हैं।
गौरतलब है कि बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र-छात्रा के अभिभावकों के बैंक खाते में शासन की ओर से ₹1200 की धनराशि भेजी जाती है। इस राशि से बच्चों के लिए दो सेट यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर तथा अन्य आवश्यक वस्तुएं खरीदी जाती हैं। अब जिला प्रशासन की इस पहल के तहत अभिभावकों को स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से बच्चों की यूनिफॉर्म सिलवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे महिलाओं को सीधे रोजगार और आमदनी का अवसर मिल सके।
इसी क्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों ने जनपद के विभिन्न विकास खंडों में ऐसे स्वयं सहायता समूहों का चिन्हीकरण शुरू कर दिया है, जिनकी सदस्य महिलाएं सिलाई कार्य में दक्ष हैं। इन समूहों की सूची तैयार कर उन्हें बेसिक शिक्षा विभाग से जोड़ा जाएगा, ताकि विद्यालयों के विद्यार्थियों की ड्रेस सिलाई का कार्य व्यवस्थित रूप से उन्हें मिल सके।
जिला प्रशासन का मानना है कि इस पहल से एक ओर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की आय में बढ़ोतरी होगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण यूनिफॉर्म तैयार होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह योजना महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रशासन को उम्मीद है कि इस मॉडल के सफल होने पर भविष्य में अन्य विभागों के कार्यों में भी स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।





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