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जिलाधिकारी आर्यका अखौरी की अध्यक्षता में!...एक दिवसीय वायर सेलर मीट कार्यक्रम का हुआ आयोजन

गाजीपुर/उत्तर प्रदेश


जिलाधिकारी आर्यका अखौरी की अध्यक्षता में!...एक दिवसीय वायर सेलर मीट कार्यक्रम का हुआ आयोजन


किरण नाई वरिष्ठ पत्रकार


गाजीपुर। राज्य आयुष मिशन के तत्वाधान में औषधीय पौध उत्पादन एवं निर्यात के सम्बन्ध में एक दिवसीय वायर सेलर मीट कार्यक्रम का आयोजन जिलाधिकारी आर्यका अखौरी की अध्यक्षता में और मुख्य अतिथि आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु द्वारा एक होटल में दीप प्रज्जलित कर शुभारम्भ किया गया।

आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु ‘ ने कहा कि आयुष एवं योगा से विश्वभर में भारत की पहचान हुई है तथा औषधीय फसलों के उत्पादन करने से किसान अपनी आय में अनन्त सीमा तक वृद्धि कर सकते है। मंत्री द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनान्तर्गत प्याज बीज का वितरण कृषकों के मध्य किया गया। अन्त में कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन एस०के० सुमन सचिव, हाफेड द्वारा किया गया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने औषधीय पौधों की उपयोगिता एवं मूल्य संवर्धन के बारे में जानकारी दी तथा कहा कि औषधीय फसलों को क्रियान्वयन कर विभाग की योजना का लाभ लेकर कृषक अपनी आय में दो से तीन गुनी वृद्धि कर सकते हैं।डा० आर०सी० वर्मा कृषि विज्ञान केन्द्र, आंकुशपुर द्वारा औषधीय फसलों यथा-सतावर, अश्वगंधा, सर्पगन्धा, तुलसी, ऐलोवेरा, कालमेघ आदि फसलों के वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकी के विषय में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। संजय सिंह, सदस्य निदेशक संचालक मण्डल, हाफेड के द्वारा हाफेड का परिचय एवं महत्व के बारे में प्रकाश डाला। मीना शुक्ला, औषधीय उत्पादक एवं क्रय विक्रय महिला कृषक की सफलता की कहानी प्रस्तुत की। जिला उद्यान अधिकारी द्वारा आये हुए अतिथियों का स्वागत एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना के बारे में विस्तारपूर्वक से अवगत कराया गया। रंगबहादुर सिंह, प्रगतिशील औषधीय कृषक ने औषधीय फसलों के उत्पादन एवं उसकी उपयोगिता तथा राष्ट्रपति डा० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित किये जाने के बारे में अवगत कराया । उप कृषि निदेशक द्वारा आयुष मिशन योजना के बारे में विस्तारपूर्वक एवं निर्यात के सम्बन्ध चर्चा की गई। उप निदेशक विपणन द्वारा अवगत कराया गया कि एपीडा के माध्यम से औषधीय फसलों के निर्यात विदेश में किये जाने पर चर्चा की गई। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि एफ०पी०ओ० के माध्यम से औषधीय फसलों के उत्पादन एवं निर्यात कृषकों के मध्य कराई जाए।

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