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चित्रकूट जेल मिलन कांड के 71 दिन बाद जेल अधीक्षक अशोक सागर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। ये 850

चित्रकूट जेल मिलन कांड के 71 दिन बाद जेल अधीक्षक अशोक सागर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। ये 850 पन्नों की है।


किरण नाई वरिष्ठ पत्रकार


चित्रकूट:- चित्रकूट जेल मिलन कांड के 71 दिन बाद जेल अधीक्षक अशोक सागर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। ये 850 पन्नों की है। इसमें निखत के जेल में आने की सेटिंग कराने से लेकर उसकी गिरफ्तारी तक की कहानी हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे निखत ने छोटे से लेकर बड़े कर्मचारियों और अधिकारियों को सेट करवाया। इसके बाद एक VIP की तरह अपने पति से जेल के अंदर मीटिंग करती रही।

चार्जशीट में जेल कांड में मेन रोल प्ले करने वाले जेल अधीक्षक अशोक सागर का भी काला चिट्ठा लिखा है। जेल अधीक्षक के खातों से लेकर उनकी सारी डिटेल की जांच की गई है। इसमें कई चौंकाने वाली चीजें सामने आई हैं।

पहले पढ़िए कब हुआ था चित्रकूट जेल में मिलन कांड…

11 फरवरी, 2023 को चित्रकूट डीएम-एसपी को सूचना मिली थी कि मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास से मिलने उसकी पत्नी निखत अवैध तरीके से जेल आती है। इसके बाद डीएम-एसपी ने जेल में छापेमारी की। वहां बाहर से बंद एक कमरे के अंदर निखत मिली थी। जबकि अब्बास चंद मिनट पहले ही कमरे से निकल गया था। पुलिस ने निखत को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद, निखत के ड्राइवर को भी अरेस्ट किया। अभी निखत और उसका ड्राइवर चित्रकूट जेल में बंद है। वहीं, अब्बास अंसारी को प्रशासन ने कासगंज जेल शिफ्ट कर दिया। इस मामले में 3 मई को चार्जशीट दाखिल की गई है।

चार्जशीट में खुलासा, जेल अधीक्षक के घर का सारा खर्च चलाती थी निखत

चार्जशीट के मुताबिक, निखत अंसारी ने सबसे पहले जेल में एंट्री पाने के लिए जेल कैंटीन के ठेकेदार नवनीत सचान का सहारा लिया था। नवनीत ने ही जेल के अंदर सारे छोटे कर्मचारियों को सेट किया था। इसके बाद उसी ने निखत को जेल अधीक्षक से मिलवाया था। निखत ने पैसों से जेल अधीक्षक का मुंह बंद कर दिया।

निखत ने पहली मुलाकात में जेल अधीक्षक को 15 लाख की कार गिफ्ट की थी। उसने कार के 12 लाख रुपए जेल अधीक्षक के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए थे। कार का 12 लाख का पेमेंट जेल अधीक्षक ने किया था। वहीं 3 लाख का पेमेंट कहीं और से हुआ था। इसकी जानकारी जेल अधीक्षक को भी नहीं है।

आरोपी जेल अधीक्षक है, जो अभी लखनऊ जेल में बंद है। इसने निखत से कई सारे महंगे गिफ्ट लिए थे।

सैलरी का थोड़ा सा भी हिस्सा अकाउंट से नहीं निकाला था

जांच में ये भी सामने आया कि जेल अधीक्षक अशोक सागर ने 1 साल से अपनी सैलरी का थोड़ा-सा भी हिस्सा अकाउंट से नहीं निकाला था। उसका सारा खर्चा निखत ही उठा रही थी। उसकी सैलरी से बस उसका लोन का पैसा कटता था, जो उसने घर बनवाने के लिए लिया था। इसके अलावा 1 रुपया भी जेल अधीक्षक के अकाउंट से नहीं निकाला गया।

जेल अधीक्षक को एंटी करप्शन कोर्ट लखनऊ में पेश किया गया था

जेल अधीक्षक अशोक सागर की गिरफ्तारी के बाद उसके घर की तलाशी में उसके पास से एक गाड़ी और 4 लाख रुपए मिले थे। इन पैसों को अशोक सागर ने अपने किचन में बनी एक अलमारी में रखा था। इन पैसों और गाड़ी का ब्योरा भी अशोक सागर नहीं दे पाया था। इसके बाद उसे एंटी करप्शन कोर्ट लखनऊ में पेश किया गया। यहां से अशोक सागर को लखनऊ जेल में बंद कर दिया गया।

निखत और उसका ड्राइवर अभी चित्रकूट जेल में बंद है। वहीं अब्बास को कासगंज जेल शिफ्ट कर दिया गया।

निखत जेल अधीक्षक की फैमिली को बाहर घूमने जाने के लिए भी भेजा करती थी

जेल अधीक्षक ने ये कबूला था कि निखत और अब्बास अंसारी के पैसों से उसने एक कार ली थी। साथ ही, निखत अंसारी उसके घर का सारा खर्चा चला रही थी। वो उसके घर पर खाने-पीने के सामान से लेकर ज्वेलरी-कपड़े सब भेजा करती थी। यहां तक कि वो उसको और फैमिली को बाहर घूमने जाने के लिए भी भेजा करती थी। सबका खर्चा वही उठाती थी। उसकी पत्नी के लिए भी महंगे गिफ्ट भिजवाया करती थी।

इतना ही नहीं, निखत ने जेलर संतोष कुमार और वार्डन जगमोहन को भी पति से मिलाने के नाम पर पैसे और कई तरह के गिफ्ट दिए। निखत-अब्बास की मुलाकात कराने में डिप्टी जेलर चंद्रकला का भी हाथ था। इसके पास से भी घूस के 5 लाख 80 हजार रुपए, 2 मोबाइल फोन और एक कार बरामद हुई है।

निखत चित्रकूट में इसी घर में रुका करती थी। ये घर उसको एक सपा नेता ने किराए में दिलाया था।

निखत चित्रकूट में इसी घर में रुका करती थी। ये घर उसको एक सपा नेता ने किराए में दिलाया था।

अब पढ़िए इस मिलन कांड में जेल की कैंटीन के ठेकेदार नवनीत सचान की भूमिका के बारे में

निखत ने जेल के अंदर घुसने के लिए सबसे पहली सीढ़ी नवनीत को ही बनाया था। इसका कारण था नवनीत की जेल अधिकारियों के बीच में अच्छी पकड़। नवनीत की जेल अधिकारियों से सीधी बातचीत थी। पूछताछ में सामने आया था कि निखत के ड्राइवर ने नवनीत को उससे मिलवाया था। कम से कम 15 दिन तक मुलाकात के बाद नवनीत को इस काम के लिए राजी किया गया था।

निखत ने नवनीत को उसका काम बढ़वाने का लालच दिया था। साथ ही महंगा फोन और पैसे भी दिए थे। इसके बाद नवनीत ने जेल के अधिकारियों से इस मामले में बात की। उसने पहले छोटे कर्मचारियों को मनाया। सब को पैसों का लालच दिया। उसके बाद बड़े अधिकारियों तक मिलने का मैसेज पहुंचाया। उनसे मिलने का समय मांगा।

निखत हमेशा नवनीत को गिफ्ट और पैसे दिया करती थी

ऐसा बताया गया कि निखत के मिलने के बारे में कैंटीन से ही पर्ची पर लिखकर मैसेज जेल के अंदर जाता था। उसके बाद उसी पर्ची पर रिप्लाई आता था। रिप्लाई के अनुसार ही आगे का प्लान बनाया जाता था। कई बार तो कैंटीन से पर्ची के माध्यम से अब्बास अंसारी से भी बात की गई। ये सारे मैसेज निखत भिजवाया करती थी। इन सारे कामों के लिए निखत हमेशा नवनीत को गिफ्ट और पैसे दिया करती थी।

ये फोटो निखत और अब्बास की शादी की है। अब्बास को जब भगोड़ा घोषित किया गया था, तभी उसने जयपुर में शादी कर ली थी।

चित्रकूट जेल में लगभग 20 कैमरे बढ़ाए गए

चित्रकूट जेल मिलन कांड के बाद चित्रकूट जेल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। चित्रकूट के डिप्टी जेलर राजीव सिंह ने बताया कि यहां पर लगभग 20 कैमरे बढ़ा दिए गए हैं। चित्रकूट जेल के 8 कैमरे लखनऊ से सीधे अटैच हैं। जिनकी वहीं से निगरानी की जाती है। उन कैमरों को कभी भी बंद न करने का आदेश है।

उन्होंने बताया कि जेल में बंद कुख्यात अपराधियों की निगरानी CCTV से की जा रही है। इनकी सभी गतिविधियां रिकॉर्ड की जा रही हैं। चित्रकूट जेल में मिलन कांड के बाद जेल में मिलने आने वाले लोगों को डबल जाली से मिलवाया जा रहा है। मिलने आने वाले लोगों का फेस सही से कैमरे में कैप्चर किया जाता है।

जेल में मिलने पर तीन पाॅइंट पर चेकिंग

चित्रकूट जेल में सुबह 10 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक मिलाई (मुलाकात) होती है। कैदियों से मिलने आने वाले वहां अपना आधार कार्ड दिखाकर 10 रुपए की पर्ची कटवाते हैं। इसके बाद मिलने वाले कैदी का नाम बताते हैं और बैठ जाते हैं। पर्ची काटने वाला व्यक्ति उस कैदी के पास जाता है और उसे सूचित करता है कि तुमसे मिलने फलां नाम का व्यक्ति आया है। इसमें तुम्हारी क्या राय है?

जब वह कहता है ठीक है यह मेरा नजदीकी रिश्तेदार या परिचित है, उसे भेज दो। तब मिलने वाले की चेकिंग होती है। कपड़ों से लेकर उसके बाल, जूते-चप्पल सब चेक होते हैं। सारा सामान बाहर रखवा लिया जाता है।

खाने का सामान भी परमिशन के बाद अंदर ले जाने दिया जाता है। उसके बाद तीन बार उसकी रजिस्टर में एंट्री होती है। तब मिलने आने वाला कैदी के पास जा पाता है। लेकिन, निखत इसमें से कोई भी पैरामीटर पूरा नहीं करती थी। उसकी कहीं पर कोई भी चेकिंग नहीं होती थी। वो अपना सारा सामान साथ लेकर जाती थी।

अपने पिता के साथ अब्बास अंसारी। अब्बास मां के साथ मिलकर पिता का पूरा नेटवर्क देख रहा था।

अपने पिता के साथ अब्बास अंसारी। अब्बास मां के साथ मिलकर पिता का पूरा नेटवर्क देख रहा था।

पिता मुख्तार के जेल जाने के बाद अब्बास ने संभाला पूरा नेटवर्क

पूर्वांचल का माफिया मुख्तार अंसारी साल 2005 में जेल चला गया। मुख्तार के जेल जाने के बाद पत्नी अफशा अंसारी उनका कारोबार देखती रही। साल 2010 से बड़ा बेटा अब्बास पिता के काम में शामिल होने लगा।

वो राजनीति में भी सक्रिय हो गया। उसके बाद साल 2012 में पिता की विरासत को संभालने के लिए फील्ड में आ गया। पिता के लिए रैली और जनसभाएं करना अब्बास ने शुरू कर दिया था।

85 दिन से जेल से नेटवर्क चला रहा था अब्बास:जेल सुपरिटेंडेंट के बगल वाले VIP रूम में पत्नी से मिलता था, जेलर से प्रहरी तक सब सेट थे

मनी लॉड्रिंग केस में चित्रकूट जेल में बंद अब्बास अंसारी जेल से ही सारा नेटवर्क चला रहा था। पिता माफिया मुख्तार अंसारी के रियल एस्टेट के कारोबार, ठेकेदारी और कंस्ट्रक्शन कंपनी वह यहीं से ऑपरेट कर रहा था। वो जेल में बैठकर अपने गैंग के गुर्गों को कमांड देता था।

सिर्फ यही नहीं, जेल से ही वह अपने सारे कामों पर नजर रखता था। इस काम को वह अपनी पत्नी निखत के फोन के जरिए करता था। निखत अपने पति से मिलने हर दूसरे-तीसरे दिन चित्रकूट जेल में अवैध तरीके से जाया करती थी। वह मुलाकात के साथ ही पति को जेल से भगाने की साजिश भी रच रही थी।

जेल में पति से मिलने की जिद कर रही निखत:दाल-रोटी की जगह बिस्किट खाया; चित्रकूट से कासगंज जेल शिफ्ट होगा विधायक अब्बास

विधायक अब्बास अंसारी की पत्नी निखत अंसारी को जेल में 2 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। जेल के अंदर पति अब्बास से अवैध तरीके से मिलने के आरोप में शनिवार देर शाम निखत को मेडिकल के बाद चित्रकूट जेल में ही बंद कर दिया गया था। जहां अब्बास पहले से बंद है। जेल जाने के बाद से निखत बार-बार अपने पति से मिलने के लिए बोल रही है, लेकिन जेल प्रशासन दोनों की मुलाकात नहीं करा रहा है। मंगलवार देर शाम अब्बास अंसारी को कासगंज की जेल में शिफ्ट करने की शासन ने मंजूरी भी दे दी है।

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