‼️चार साल के मासूम भांजे का गला रेतने वाले!..कलयुगी मामा को न्यायालय ने सुनाया मृत्यु दंड‼️
- alpayuexpress
- Jun 11
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‼️चार साल के मासूम भांजे का गला रेतने वाले!..कलयुगी मामा को न्यायालय ने सुनाया मृत्यु दंड‼️

सुभाष कुमार ब्यूरो चीफ
जून गुरुवार 11-6-2026
गाज़ीपुर:-ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर हत्या के एक मामले में न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है,अगर कहा जाए तो द्वापर काल में भी एक कंस मामा था जो अपने ही भांजे श्री कृष्ण को मारने के लिए न जाने कितने जतन किए लेकिन उस वक्त तो नहीं मार पाया लेकिन कलयुग के कंस ने अपने चार साल के भांजे को इस तरह मौत के घाट उतारा की उसके शरीर और गले में मात्र 4 सेमि ही बचा था बाकी सब कट चुका था आज इसी मामले में गाजीपुर के अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह की कोर्ट ने कलयुग के कंश मामा को फांसी की सजा के साथ ही ₹50000 के अर्थ दंड की सजा सुनाई है सजा सुनाए जाने के बाद भी आरोपी अमजद खान के चेहरे पर किसी भी बात का शिकन तक नहीं था।

गाजीपुर जनपद के गहमर थाना क्षेत्र के बारा गांव में साल 2021 में अमजद खान अपने 4 साल के मासूम भांजा दानियाल के साथ खेल रहा था और खेलने के दौरान ही किसी बात को लेकर अमजद खान ने अपने मासूम भांजे के गले को चाकू से रेत डाला। इसके बाद परिवार के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दिया था और पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी और इस पूरे मामले में आरोपी अमजद खान के भाई बहन और परिवार के लोगों ने ही जमकर गवाही किया और उस गवाही के उपरांत आज अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह ने आरोपी अमजद खान को फांसी की सजा और ₹50000 के अर्थ दंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने बताया कि सजा सुनाए जाने के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह ने आरोपी से पूछा था कि तुम्हें अपने किए पर कोई पछतावा है या नहीं तब आरोपी ने बताया कि उसे किसी भी तरह का कोई पछतावा नहीं है साथ ही उसने यह भी कहा कि जो भी मुझे उलझेगा उसे भी मैं मार दूंगा।
अधिवक्ता ने बताया की सजा सुनाए जाने के दौरान जज ने अपनी कलम को तोड़ दिया था और उन्होंने कहा था कि हो सकता है कि अब भविष्य में सुधर जाए लेकिन इसकी बातों से ऐसा नहीं लगता है इसलिए इसे दुर्लभतम से दुर्लभतम सजा मानते हुए मृत्यु दंड और ₹50000 के अर्थ दंड की सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि आरोपी ने अपने ही भांजे का इस तरह गला काटा था कि उनकी उसकी कोई भी नस नहीं बचा था मात्र 4 सेंटीमीटर बचा था यानी कि उसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थी। ऐसे में सजा सुनाए जाते वक्त जज ने यह भी कहा कि जिस मां ने अपने ही भाई के हाथों अपने चार साल के मासूम की हत्या होते हुए देखी है उसका शब्दों से व्याख्या नहीं किया जा सकता ऐसे में अभियुक्त के द्वारा किए गए कृत्य से सामाजिक संवेदना प्रभावित हो रहे हैं इसलिए मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले में कुल नौ गवाह पेश हुए जिसमें से 4 मृतक और अभ्युक्ति के परिवार वाले ही हैं उन्होंने बताया कि इस मामले में सगे भाई बहनों के गवाही के आधार पर किसी भी तरह के क्षम्य करने का मामला नहीं था इसलिए कोर्ट ने इसे मृत्यु दंड की सजा सुनाई है।





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