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ग्रामीण क्षेत्रों में भैया दूज और गोवर्धन पूजा की रही धूम

गाजीपुर/उत्तर प्रदेश


ग्रामीण क्षेत्रों में भैया दूज और गोवर्धन पूजा की रही धूम


किरण नाई वरिष्ठ पत्रकार


गाज़ीपुर। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में दीपावली के एक दिन बाद गोव‌र्द्धन पूजा का पर्व पारंपरिक ढंग से मनाया गया। इस पर्व पर महिलाओं ने गोबर से भगवान गोवर्धन की आकृति बनाकर उसकी पूजा अर्चना की। इस दौरान महिलाएं व बालिकाओं ने परंपरागत गीत गाकर शाप देते हुए भगवान गोवर्धन की मूसल से कुटाई की। इसके अलावा कायस्थ समुदाय के लोगों ने चित्रगुप्त महाराज की पूजन-अर्चन कर कलम दावात का पूजा की। वहीं भइया दूज की भी बहार रही। बहनों ने भाइयों को तिलक लगाने के साथ खीर खिलाकर उनके दीर्घायु की कामना की। सदर कोतवाली इलाके के नवापुरा, लंका आदि मोहल्लो में गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया। इस आयोजन में भारी संख्या में कन्याएं और महिलाएं शामिल रही। इस दौरान महिलाएं और कन्याओं ने गोवर्धन पूजा किया। पूजा में शामिल दिया ने बताया कि गोवर्धन पूजा को भैया दूज के नाम से भी जाना जाता है। कहावत ये भी है कि यमुना ने अपने भाई यमराज को हमेशा अपने घर बुलाती थी। लेकिन व्यस्त होने के कारण यमराज अपनी बहन के घर नहीं पहुंच पाते थे। एक दिन अचानक भैया दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। जहां यमुना ने यमराज को तिलक लगाया। जिसपर प्रसन्न होकर इच्छा अनुसार वरदान मांगने को कहा। इस पर यमुना बोली यदि तुम कोई वर देना है तो वरदान दो कि तुम हर साल इस तिथि को मेरे घर आओगे और मेरा सत्कार स्वीकार करोगे। भाई दूज के दिन जो भी आपकी तरह अपनी बहन के घर जाएगा। बहन से टीका लगवाएगा और बहन उसे प्यार से खिलाएगी, तो वह आपसे कभी नहीं डरेगा, तब यमराज ने यमुना को वरदान दिया कि ऐसा ही होगा। कथानुसार गोकुल में सूखे से मुक्ति दिलाने की कवायद में इन्द्र देव द्वारा की गई मूसलाधार बारिस से लोगों को बचाने के लिए कृष्ण भगवान द्वारा गोवर्धन पर्वत कानी उंगली पर उठाये जाने के प्रसंग पर आज भी हिन्दु धर्मानुयायी गोवर्धन पूजा हर साल दिवाली के बाद मनाते है, किन्तु इस वर्ष बेहद कम हुई बारिस से उपजे सूखे से बेहाल महिलाओं ने भगवान कृष्ण से यह प्रार्थना करते हुए इस त्योहार को मनाया कि हे ईश्वर पुनः ऐसा सूखा मत दिखाना। सूखे के गम से त्रस्त होने के बावजूद एक आाशा के कारण और परम्परावश गाजीपुर की महिलाओं ने भी गोवर्धन पूजा श्रद्धा पूर्वक मनाया।

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