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उल्हासनगर में तेजी से फैल रही है कोरोना बीमारी आज कुल कोरोना बीमारी के 12 मरीज पाए गए



(रितिक रजक की रिपोर्ट)


मई शुक्रवार 15-5-2020


उल्हासनगर में तेजी से फैल रही है कोरोना बीमारी आज कुल कोरोना बीमारी के 12 मरीज पाए गए


कोरोना बीमारी मरीजों का आंकड़ा पहुंचा 81 तक

उल्हासनगर में तेजी से फैल रही है कोरोना बीमारी

आज कुल कोरोना बीमारी के 12 मरीज पाए गए

कोरोना बीमारी मरीजों का आंकड़ा पहुंचा 81 तक


*उल्हासनगर -* उल्हासनगर शहर में कोरोना बीमारी का तेजी हो रहा है फैलाव धीरे धीरे बढ़ रहा है जिससे आज कुल 12 मरीज पाए गए है। कोरोना बीमारी मरीजों का आंकड़ा 81 तक पहुंच गया है। कोरोना बीमारी को नियंत्रित करने के लिए उल्हासनगर महानगर पालिका के आयुक्त सुधाकर देशमुख जी जान तोड कर प्रयास कर रहे है लेकिन शहर के लोग पालिका प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेश को चुनौती देने का काम कर रहे है परिणामस्वरूप शहर में कोरोना बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है जिसके लिए शहर के लोगों ही जिम्मेदार माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जब से कोरोना बीमारी का फैलाव संपूर्ण विश्व के साथ साथ भारत देश में जगह जगह हो रहा था उस समय से ही उल्हासनगर महानगर पालिका के आयुक्त सुधाकर देशमुख ने अपने कार्यप्रणाली से शहर में कोरोना बीमारी को घुसने नही दिया। आयुक्त सुधाकर देशमुख ने शहर के नागरिकों के सुरक्षा के लिए अलग अलग नियमावली बनाई पालिका प्रशासन में कार्यरत अधिकारी तथा कर्मचारी को सतर्क रहने के आदेश जारी किए। जिससे कोरोना बीमारी का फैलाव उल्हासनगर में नही हो इसलिए पूरी फिल्डिंग लगाई थी।

पालिका प्रशासन द्वारा शहर के लोगों को बार बार अपील की जा रही थी कि घर पर बैठे घर से बाहर नही निकले लेकिन इन लोगों ने पालिका प्रशासन की अपील को अनदेखा कर उधर उधर भटकना चालू कर दिया जो अब तक चल रहा है।

पालिका के आयुक्त सुधाकर देशमुख के मार्गदर्शन पर पालिका प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा कार्य चल रहा है। अब तक शहर में एक भी कोरोना बीमारी का मरीज नही मिला था। जिससे पालिका आयुक्त सुधाकर देशमुख के कार्यप्रणाली की शहर के लोगों द्वारा और सांसद तथा पालकमंत्री ने प्रशंसा की थी। जिससे संपूर्ण ठाणे जिले में कोरोना बीमारी फैल गई थी लेकिन उल्हासनगर शहर में कोरोना बीमारी का एक भी मरीज नही था।

समय बीतता गया और शहर की परिस्थिती एकदम अलग ही हो गई। शहर में कोरोना बीमारी के मरीज एक के बाद एक हर दिन बढ़ रहे थे और अब शहर में कोरोना बीमारी के मरीजों का आंकड़ा कुल 81 पर पहुंच गया है।

पालिका आयुक्त सुधाकर देशमुख के मार्गदर्शन पर पालिका के अधिकारी, कर्मचारी और पुलिस प्रशासन के अधिकारी तथा कर्मचारी वर्ग के लोग पूरी लगन और मेहनत से काम कर रहे है।

शहरवासियों की समस्या को देखते हुए पालिका आयुक्त सुधाकर देशमुख द्वारा समय समय पर आदेश निकाल कर नए निर्णय लिए गए है जिसमें कुछ लोग जानबूजकर पालिका के आदेशों को नजर अंदाज कर रहे है जिसका नतीजा आज शहरवासियों भुगत रहे है।

संचार बंदी कानून के तहत शहर में लोगों को घर से बाहर निकल के लिए मना किया जा रहा है लेकिन कुछ लोग बिना किसी काम से इधर उधर भटकते हुए देखे जा सकते है। ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा ड्रोन कैमरे की मदद ली। लेकिन लोग सुधारने का नाम नही ले रहे है।

देखते ही देखते शहर के कई क्षेत्र हॉटपॉट क्षेत्र में बदल गए। इसका प्रमुख कारण यह है की शहर में बाहरी लोगों की घुंसखोरी ही बताई जा रही है। क्योंकि कोरोना बीमारी शहर में निर्माण नही हुई है यह बीमारी किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा ही शहर में आ गई है। जिसने अपना रुख बदल कर पूरे शहर में हाहाकार मचा रखा है।

पालिका प्रशासन द्वारा कोरोना बीमारी से मुकाबला करने की पूरी तैयारी कर ली है। साथ ही कोरोना बीमारी के मरीजों की व्यवस्था के लिए अलग अलग जगहों पर अस्पताल में उपचार करने की व्यवस्था की गई है। अभी तो कोरोंटाईन किए गए लोगों के लिए अलग अलग होटलों में मरीज अपने खर्चे से कोरोंटाईन के लिए रह सकते है।

अभी भी उल्हासनगर शहर के दो नंबर स्थित गोल मैदान क्षेत्र में कई लोग शाम के समय टहलने के लिए घर से बाहर निकलते है आश्चर्य की बात यह है की यह लोग अपने साथ अपने पालतू जानवरों को भी टहलते है। अभी अपने शहर की स्थिती पहले से अधिक बदतर हो गई है। इससे इन लोगों ने सबक सिखने की जरूरत है। क्योंकि यह लोग अपने साथ साथ अपने परिवार के लोगों की भी जान खतरे में डाल रहे है। साथ अपने परिसर को भी खतरा निर्माण कर रहे है।

पुलिस प्रशासन द्वारा ऐसे फालतू घूमने वाले लोगों पर कारवाई करने की शुरुवात की गई है। जिससे अब इन लोगों का टहलना कम हो गया है।

शहर में कोरोना बीमारी के मरीजों का आंकड़ा 81 तक पहुंच गया है। जिसमें अभी कुल 66 कोरोना बीमारी के मरीजों पर उपचार शुरू है और 11 लोगों को उपचार कर घर पर भेजा गया है इस बीमारी के कारण अब तक कुल 4 लोगों की मौत हुई है।

उल्हासनगर के कोविडी अस्पताल में 33 कोरोना बीमारी के मरीजों पर उपचार जारी है। राज्य कामगार बीमा योजना के अस्पताल में 30 कोरोना बीमारी के मरीजों पर उपचार चल रहा है। बाकी 3 कोरोना बीमारी के मरीजों पर ठाणे, कल्याण और भिवंडी के अस्पताल में उपचार शुरू है।

कोरोना बीमारी के फैलने से रोकने के लिए अभी तक कैम्प नंबर तीन स्थित फॉलोवर लेन, कैम्प नंबर चार स्थित संभाजी चौक स्थित जिजामाता कॉलनी, कैम्प नंबर तीन स्थित सम्राट अशोक नगर, चोपड़ा कोर्ट परिसर में ब्राम्हण पा डा, कैम्प नंबर चार स्थित राहुल नगर परिसर को पालिका प्रशासन द्वारा सील किया गया है।

पालिका आयुक्त सुधाकर देशमुख द्वारा जारी किए गए प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक आज कुल 11 कोरोना बीमारी के मरीज पाए गए है। इस में कैम्प नंबर एक में सेंचुरी कंपनी के सामने एक 54 साल की महिला, सम्राट अशोक नगर से 4, ब्राम्हण पाडा से 21 साल की महिला, आदर्श नगर धोबी घाट से 4, शंकर कॉलनी से 35 साल की व्यकी और सुभाष टेकडी क्षेत्र से 42 साल के व्यक्ती इन सभी को उपचार करने के लिए उल्हासनगर के कैम्प नंबर चार स्थित कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

लोगों का मानना है की जब तक बाहरी लोगों का शहर में आवागमन पर रोक नही लगाई जाती तब तक इस बीमारी पर नियंत्रण रखना संभव नही है। साथ ही उल्हासनगर शिवसेना के शहर प्रमुख राजेंद्र चौधरी ने हाल ही में शहर की सभी सीमाओं को बंद करने की मांग की है। क्यों की शहर में बाहरी लोगों के कारण ही यह बीमारी बढ़ रही है। जिसके चलते कई जगहों पर इस बीमारी की चपेट में स्वास्थ विभाग के कर्मियों, पुलिस कर्मचारी, मनपा कर्मचारी आ गए है। बाहर से आने वाले हर व्यक्ति को कोरंटाईन करना जरुरी है। जिससे इस बीमारी को रोका जा सकता है।

उल्हासनगर महानगर पालिका में कई कर्मचारी और अधिकारी है जो शहर के बाहर से आते है और वह जहा से आते है वहा पर यह बीमारी फैल गई है परिणामसवरूप उस कर्मचारी या अधिकारी के जरिए शहर में इस बीमारी को रोकना मुश्किल है। इस बारे में पालिका प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। उल्हासनगर महानगर पालिका में ऐसे भी अधिकारी है जिन्हे पालिका प्रशासन द्वारा कोई भी जिम्मेदारी नही दी गई है फिर भी यह अपनी चार पहिया वाहन पर ऑन ड्यूटी यू एम सी का बोर्ड लगाकर घूम रहे है। जो कर्मचारी या अधिकारी कोरोना बीमारी के प्रतिबंधित क्षेत्र से आ रहे है उन्हे ड्यूटी पर आने से मना कर दिया जाना चाहिए या फिर उनकी शहर में रहने की व्यवस्था की जानी चाहिए इस बारे में प्रशासन को ध्यान देना चाहिए ऐसी मांग जनमानस से हो रही है।

आश्चर्य की बात यह है कि गत दिनों मनपा के एक अधिकारी के परिवार के लोगों को शहर के बाहर से गांव से लाया गया था। उन्हे लाने के लिए वह अधिकारी खुद गया था या फिर उसने अपने ड्राईवर की भेजा था यह तो उन्हे ही पता होगा। लेकिन उन लोगों को अधिकारी के परिवावालों को और ड्राईवर या फिर उस अधिकारी को कोरंटाईन करना जरुरी था वह क्यो नही किया गया ऐसा सवाल निर्माण हुआ है। दूसरा यह भी सवाल उठता है कि क्या उस अधिकारी (अगर वह गया होगा) या फिर ड्राईवर का मेडिकल जांच पड़ताल किया गया है क्या। क्या इस बारे में उस अधिकारी ने पालिका आयुक्त की इजाजत ली है या नही यह तो जांच पड़ताल करने पर ही मालूम होगा।

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